US Banks Restrict AI Agents: AI खाली कर देगा बैंक खाता? बैंकों में AI एजेंट्स का बड़ा खतरा! | TV9
Publicado no IA Dots ·
Agentes de IAAI Signaldot-ai_agentsdot-artificial_intelligenceHindiidioma-hiyt-kJv1jUdZGyU
Vídeo em Hindi, publicado pelo canal TV9 Bharatvarsh.
इस सामग्री के बारे में: नीचे दिया गया सारांश, मुख्य बिंदु और विषय वीडियो की ट्रांसक्रिप्ट से स्वचालित रूप से तैयार किए गए हैं। वे वीडियो में प्रस्तुत सामग्री, राय, दावों और भविष्यवाणियों को दर्शाते हैं और IA Dots की ओर से किसी समर्थन, सत्यापन या तथ्य-जांच का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं।
वीडियो सारांश
वीडियो में दुनिया भर में चल रहे विभिन्न संकटों, जैसे कि साइबर सुरक्षा के खतरे, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी चुनौतियाँ, वैश्विक ऊर्जा संकट, और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों पर चर्चा की गई है। इसके साथ ही, ओमान-इंडिया पाइपलाइन और ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने जैसे विषयों पर भी बातचीत की गई है।
मुख्य बिंदु
- पीएचपी में दो गंभीर कमियाँ सामने आईं और कैलिफोर्निया में 57 लाख स्कूलों का डेटा चोरी हुआ।
- अमेरिकी बैंकों द्वारा एआई एजेंट्स की पहुँच सीमित की जा रही है क्योंकि बिना अनुमति फंड ट्रांसफर होने का खतरा है।
- दुनिया भर में ऊर्जा संकट गहराता जा रहा है और होरमुज में तेल टैंकरों पर हमलों के कारण आपूर्ति बाधित हुई है।
- अंतर्राष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 114 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुँच गई है।
- भारत द्वारा ऊर्जा सुरक्षा के लिए विभिन्न देशों से आयात बढ़ाने और वैकल्पिक स्रोतों पर ध्यान देने की बात कही गई।
विषय
साइबर सुरक्षाआर्टिफिशियल इंटेलिजेंसऊर्जा संकटकच्चा तेलवैश्विक राजनीतिआर्थिक चुनौतियाँ
वीडियो का ट्रांसक्रिप्ट
उपलब्ध कैप्शन का पाठ; इसमें त्रुटियाँ हो सकती हैं।
पीएचपी में दो गंभीर खामियां सामने आई। जापान के प्रधानमंत्री की कंपनियों से अपील फॉरेन सिक्योरिटी अपडेट करने की अपील की। एआई एजेंट्स की मदद से 100 कंपनियों में सेंध का दावा किया जा रहा है। कैलिफोर्निया के 57 लाख स्कूलों के डाटा चोरी हो गए हैं। तो दूसरी तरफ एक आग तो आपको सड़कों पर प्रत्यक्ष दिखाई दे रही है। दूसरी तरफ एक युद्ध ऐसा भी लड़ा जा रहा है जो अब साइबर वर्ल्ड का वॉर है और तमाम जगहों को अफेक्ट कर रहा है। जैसे अब अगली खबर देखिए। अमेरिकी बैंकों में एआई एजेंट्स को लेकर अलर्ट। जेपी मॉ्गन और बैंक ऑफ अमेरिका समेत बड़े बैंक एआई की पहुंच सीमित कर रहे हैं। बिना अनुमति बैंक खातों से फंड ट्रांसफर का खतरा हो रहा है। एग्जिओस के हवाले से बड़ी खबर आ रही है। तो एआई जहां हर एक एवन्यू में आप उसकी दखल बढ़ते हुए देख रहे हैं। वहीं आपको याद होगा बहुत सारे एक्सपर्ट्स और उनमें वो भी थे जिन्होंने एआई की शुरुआत की। वो भी दुनिया को आगाह कर रहे थे कि बहुत जल्द इसके खतरे देखने को मिलेंगे। अब देखिए बैंक अपने यहां एआई का इंटरवेंशन सीमित करना चाह रहे हैं क्योंकि उनको यह खतरा महसूस हो रहा है कि अब ये बात वहां जा रही है जहां उनके हाथ से चीजें निकल जाएंगी ट्रांसफर होने लगेंगे उनके खातों से पैसे और वो कुछ कर नहीं पाएंगे। अब अगर ऐसा है तो यह आशुतोष कर्नाटक साहब इकोनॉमिकली और दुनिया के के मजबूत या वलनेरेबल होने के हिसाब से तो अभी अगर देखा जाए तो बड़े सारे चिंग्स दिखाई दे रहे हैं सर बड़ा मुश्किल हाल दिखाई दे रहा है तमाम अलग-अलग जगहों पर। आशुतोष जी सवाल फिर से बोल सकते हैं थोड़ा आवाज कट रहा था। जी मैं यह कह रहा हूं कि कहां-कहां से ह्यूमन रेस के लिए दुश्वारियां आ रही हैं। अगर उन उन तमाम डायमेंशंस को आप देखना शुरू करें तो अब ये देखिए साइबर वर्ल्ड में भी बड़ी लड़ाईयां लड़ी जा रही हैं। ये भी दुनिया के लिए एक नए तरह का चैलेंज है और ये पहले से चली आ रही दुश्वारियों को और बढ़ाने वाला मामला है। जी देखिए सवाल ये है कि अभी जैसा आप एक पैनलिस्ट ने बोला था ये ट्रांसफॉर्मेशन की स्थिति है। यह पूरा वर्ल्ड ना एक अभी अभी चेंज मोड में है और यह कहीं ना कहीं इसकी जो धुरी है वो अमेरिका के डॉनल्ड ट्रंप के पास है। अभी उन्होंने देखिए जो रशिया के साथ एक एग्रीमेंट कर लिया भाई हम वहां से डीजल लेंगे और अभी आप जर्मनी की बात कर रहे हैं। अभी आप फ्रांस की बात कर रहे हैं। भारत और आपने थोड़ा उसका एक ट्रेलर तो देखा ही देखा था। बाकी और कंट्री होते हैं तो कहीं ना कहीं मेरे को लगता है जो लोग सप्रेशन हो रहा है वो बाहर निकल के लोगों का आ रहा है। एंड मोर टुवर्ड्स द डेमोक्रेसी ये एक चीज कहीं बाहर निकल के आ रही है। अब ये कैसे संभलेगी ये समझ में बात नहीं आती। एक तरफ से पब्लिक का गुस्सा है। पब्लिक की बात है। दूसरी ओर से एनर्जी क्राइसिस है। एनर्जी क्राइसिस ऐसी इतनी कॉम्प्लेक्स हो गई है। इसको कैसे समझा कुछ समझ में बात नहीं आती। वहां से ट्रंप साहब ने बोला रशिया से मैं डीजल लूंगा। और कल मार्को रिव्यू आए थे। उन्होंने इंडिया को बोला कि भाई आप वेनेजुडा का तेल को यहां पर प्रोसेस करोगे। ठीक है? फिर हमको यह बोला कि आप ठीक है अब आप रशिया से तेल खरीद सकते हो। भाई भारत क्या करे? भारत मेरे ख्याल से एक बड़ी अच्छी स्थिति है कि मैं ये सब्जेक्ट को हम लोग पिछले एक साल से बात कर ही रहे हैं कि हमें किसी भी ढंग से अपने इंपोर्ट को डिफरेंट-डिफरेंट कंट्रीज से मैं एनर्जी तक ही सीमित रहूंगा। अभी कि डिफरेंट-डिफरेंट कंट्रीज से इंपोर्ट को करना चाहिए। किसी भी ढंग से और हम ज्यादा दोष बनाए। जैसे पहले हम लोग 27 कंट्री से करते थे। आज हम 40 कंट्रीज से इंपोर्ट कर रहे हैं। और हमें एक डेफिनेटली कभी ना कभी एक हमको सब्सी पाइप लाइन लगानी चाहिए। ओमान इंडिया पाइप लाइन ऑयल ऑयल की की पाइपलाइन गैस की पाइप लाइन भी पॉसिबल है। टेक्निकली कमर्शियली ऑयल की भी पॉसिबल है। तो हम अपनी एनर्जी सिक्योरिटी हम अभी थोड़ा सा स्वार्थी बने इस बारे में कि सेल्फिशली हम अपनी कंट्री के लिए क्या कर सकते हैं? व्हाट इज़ बेस्ट फॉर अस? हमारे लिए बेस्ट ये है कि अल्टरनेट रूट हम लेके आ। अल्टरनेट सोर्सेस हम लेके आए। किसी ढंग से ढंग से हम अपनी प्राइसेस को चाहे वो गवर्नमेंट सब्सिडी दे, चाहे कुछ करे बहुत ज्यादा ना बढ़। सर अभी प्रधानमंत्री ने 15 अगस्त वाले अपने स्पीच में यह बात कही थी कि बहुत बड़ा एरिया हमारे सोर्स का ऐसा है जहां पे अवेलेबिलिटी ऑफ़ एनर्जी है। लेकिन उसको टैप नहीं किया गया है अभी तक। तो इस लिहाज से भी आप देख रहे हैं क्या कि कुछ मेजर किया जा रहा है। जी। तो तो तो तो ये ये भी हम देख रहे हैं कि जैसे इंडिया में भी भारतवर्ष में भी अभी काफी एरिया ऐसे हैं जहां पर ऑयल एंड गैस उपलब्ध है। लेकिन वो कोशिश हो रही है पिछले मैं तो 2014 ऑनवर्ड मैं आपकी बात बता सकता हूं कि काफी एक्सप्लोरेशन हो रहा है। अभी अंडमान निकोबार में ऑयल इंडिया को गैस मिली है। बॉम्बे हाई में ओएजीसी ने कुछ गैस एक्सपोर्ट करी है। लेकिन जिस तरीके से होना चाहिए उस तरीके से नहीं हो रहा है। नंबर वन, नंबर टू, हम कम से कम यूएई के साथ तो एक अच्छा समझौता कर सकते हैं। सऊदी के साथ अच्छा समझौता कर सकते हैं। ईरान के साथ एक अच्छा समझौता कर सकते हैं कि भाई हमको अफोर्डेबल प्राइस में हमको गैस दे ऑयल एंड गैस दे दो। तो हम एक एक पोर्टफोलियो हम ना बनाएं। जैसे हमारा इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो होता है। वैसे एनर्जी का एक पोर्टफोलियो ऐसा बनाएं ताकि हम अपनी प्राइसेस को कंट्रोल रखें एंड एनर्जी शुड बी मेड अवेलेबल। तो देयर फॉर मैं जो बात बोलता हूं ए और ए की मैरिज होनी आवश्यक है अवेलेबिलिटी एंड अफोर्डेबिलिटी की और जहां तक पूरी दुनिया में जो भी अभी चल रहा है इसको ऑब्जर्व करें और हम अपने आप को ठीक रखें मैं तो एक ही बात तो आपने तो इसमें एक्सेसिबिलिटी को भी शामिल कर लिया आप कह रहे हैं एनर्जी बास्केट में इसको हमको डवर्सिफाई करके और ज्यादा मेंबर्स को इसमें लाना होगा और कहां से हम कर रहे हैं तो आप इनफैक्ट तीनों एक ही बात कर रहे हैं लेकिन मैं अब दूसरी बात भी जानना चाहता हूं मैं राजन साहब आपके पास उसके अलावा लेट मी लेट मी जस्ट गिव एन अपडेट अपडेट टू माय व्यूअर्स सर। लेट मी कम बैक टू यू। होरमुज में सात तेल टैंकर्स पर ईरान का हमला हुआ है। ईरान का दावा है 24 घंटे में जलमार्ग पर सबसे बड़ा नुकसान हुआ है। रात भर हुए हमलों में चार जहाजों में आग लगी है। तीन टैंकर बारूदी सुरंगों से टकराकर तबाह हुए हैं। 22 दिनों में 27 कार्गो शिप और टैंकरों पर हमले हुए हैं। आईएमओ की रिपोर्ट यह बता रही है। तो एक तरफ एनर्जी क्राइसिस देखिए आग लगी हुई है तेल की वजह से और तेल में भी आग लगाई जा रही है। इसलिए तेल की आग दुनिया में और ज्यादा बढ़ती जा रही है। यह भी देख लीजिए आप। अब इधर देखिए जरा अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल $14 पर बैरल पार 5 मई 2026 के बाद पहली बार ब्रैंड क्रूड में बड़ा उछाल हुआ है। लंदन आईसीई एक्सचेंज पर ब्रिंट 114.72 डॉलर पर बैरल तक पहुंच गया। अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 100.97 के पार पहुंच गया है। होरमज में तनाव और आपूर्ति बाधित होने से यह कीमतें कितनी ज्यादा बढ़ गई हैं वो आपके सामने यहां पर इन खबरों में दिखाई दे रहा है। अब जरा यह देखिए अमेरिकन एयरलाइंस को 2026 में बड़े घाटे का अनुमान है। ईंधन की बढ़ती कीमतों से एयरलाइन पर भारी दबाव है। तीसरी तिमाही में ईंधन खर्च 67.5% बढ़कर 4.64 अरब डॉलर हुआ। तीसरी तिमाही में $269 पर मिलियन का शुद्ध घाटा। तीसरी तिमाही में माफ कीजिए। यह खबर मैं दोबारा बता देता हूं आपको। डॉलर $269 मिलियन का शुद्ध घाटा। डेल्टा यूनाइटेड और साउथ वेस्ट ने भी अनुमान अपने घटा दिए हैं। अब जरा यह देखिए ट्रंप शासन में ब्रेंट क्रूड की कीमतें कैसी-कसी रही हैं और कहां से अब कहां पहुंच गई हैं। जनवरी से शुरू करिए। देखिए जरा जनवरी में अगर आप आते हैं 2025 जनवरी ये 80.85 पर बैरल आपको दिखाई दे रहा है। जनवरी 20 ट्रंप के कुर्सी में आ जाने के बाद स्थितियां कैसे बदली हैं वो आपको दिखा रहा हूं। दिसंबर 2025 59.93 जनवरी 202688.25 अप्रैल 2026 $39.32 और यह अक्टूबर पर आ जाइए जहां पर हम खड़े हुए हैं 2026 $115 पर बैरल। अब यह अगर इस तरीके से आगे बढ़ता चला जा रहा है। यह सुरसा के मुंह जैसा खतरनाक। हालांकि इसमें ऑल टाइम हाई अभी तक दुनिया ने जो देखा है वो 2008 में देखा है। जिसमें इंट्राडे हाई एक दिन का 147 के ऊपर चला गया था डॉलर पर बैरल। लेकिन फिर वो जब वो पूरे दिन की एवरेजिंग हुई थी तो 13 143 पॉइंट समथिंग मतलब करीब-करीब 144 पर बैरल तक गया था। यहां पर देखिए ट्रंप के चार फैसलों ने तेल में आग लगाई है। 16 दिसंबर 2025 ट्रंप ने वेनेजुएला की पूरी नाकाबंदी। 15 दिनों में तेल डॉलर 59 से डॉलर 80 पर बैरल पहुंच गया था। कौन-कौन सी वो चीजें हैं ट्रंप के फैसले? फरवरी 2026 में ट्रंप ने ईरान पर सैन्य हमला किया था और ये तमाम चीजें कंट्रीब्यूट करती गई आज के हालात के लिए। हमले के बाद दाम $8 पर बैरल से लगातार यह इजाफा होता गया। यह है वो फैक्टर्स ट्रंप ने रूस के तेल खरीदारों पर 500% तक का टेरिफ लगाने की धमकी दी। और ये हर एक चीज असल में आज की दुश्वारी के लिए कंट्रीब्यूट करती चली गई है। हमारे एक्सपर्ट्स ये बता रहे हैं कि आगे भी राहत मिलने की संभावना नहीं है। और पूर्णिमा जी तो यह भी कह रही हैं कि असल में तो जो सुपरमैन कांसेप्ट है और जिस तरीके से खुद ट्रंप खुद को पोट्रे करते हैं। दुश्वारी से निकालने वाला सेवियर क्या इसी तरीके से उनको आज देखा जाए या पूरी दुनिया को दुश्वारी की आग में झोंक देने वाले तौर पर उनको देखा जाए और इसके लिए ट्रंप रिस्पांसिबल हैं या पूरी दुनिया को रिस्पांसिबल मानना पड़ेगा। आपने अभी तक जो ओपिनियंस दिए गए मेरे ख्याल से उनके आधार पर अपना पर्सपेक्टिव बना लिया होगा। धन्यवाद करता हूं। वक्त होता तो चर्चा और लंबी करनी थी। लेकिन हम सभी मेहमानों का धन्यवाद करते हैं और आप तमाम दर्शकों का
Assistir ao vídeo original no YouTube
Assuntos: Agentes de IA. Publicado no YouTube em 2026-10-23.
Seleção automática por assunto e idioma. O vídeo pertence ao canal de origem.