Gemini 4 Argon: Google's Most Powerful AI vs Claude & ChatGPT

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Vídeo em Hindi, publicado pelo canal Hrishikesh Roy.

इस सामग्री के बारे में: नीचे दिया गया सारांश, मुख्य बिंदु और विषय वीडियो की ट्रांसक्रिप्ट से स्वचालित रूप से तैयार किए गए हैं। वे वीडियो में प्रस्तुत सामग्री, राय, दावों और भविष्यवाणियों को दर्शाते हैं और IA Dots की ओर से किसी समर्थन, सत्यापन या तथ्य-जांच का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं।

वीडियो सारांश

गूगल ने अपने नए एआई मॉडल 'जेमिनाई 4 आर्गन' को लॉन्च किया है। इस वीडियो में इसके फीचर्स, सुरक्षा चिंताओं, क्लॉड और चैटजीपीटी के साथ तुलना, तथा भारत में इसकी उपलब्धता और कीमतों पर चर्चा की गई है।

मुख्य बिंदु

  • गूगल ने अपने नए शक्तिशाली एआई मॉडल जेमिनाई 4 आर्गन को लॉन्च किया है, जिसे पहले केवल साइबर सुरक्षा टीमों को परीक्षण के लिए दिया गया था।
  • यह मॉडल वीडियो देखकर सिमुलेशन बनाने, कोडिंग में मदद करने और जटिल डेटा का विश्लेषण करने जैसे कार्य कर सकता है।
  • आर्गन मॉडल 'मुझे नहीं पता' कहने में अन्य मॉडल्स की तुलना में बेहतर है और कम अनुमान लगाता है, जिससे हैल्यूसिनेशन की संभावना कम होती है।
  • कोडिंग के मामले में क्लॉड ओपस 5.5 अभी भी आर्गन से आगे माना गया है।
  • भारत में यह मॉडल मुख्य रूप से गूगल के पेड प्लान्स (AI Pro और AI Ultra) में उपलब्ध है, साथ ही जियो के कुछ यूजर्स के लिए मुफ्त ऑफर भी उपलब्ध है।
  • मॉडल का प्रदर्शन इस बात पर निर्भर करता है कि यूजर ने थिंकिंग लेवल 'लो', 'मीडियम' या 'हाई' पर सेट किया है।

विषय

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वीडियो का ट्रांसक्रिप्ट

उपलब्ध कैप्शन का पाठ; इसमें त्रुटियाँ हो सकती हैं।

Google ने अपना अब तक का सबसे पावरफुल एi मॉडल लांच किया है। नाम है जेमिनाई 4 आर्गन और फिर अपनी ही सेफ्टी रिपोर्ट में एक ऐसी लाइन लिख दी जिसे पढ़ के कोई भी चौंक जाए। और वो लाइन है वी कैन नॉट रूल आउट। मतलब Google खुद मना नहीं कर पा रहा कि हैकिंग के मामले में यह मॉडल उस लेवल तक पहुंच गया हो जिसे Google ने खुद क्रिटिकल डेंजर लेवल बोला है। इसीलिए शायद पहले 13 दिन यह मॉडल आम लोगों को मिला ही नहीं। सिर्फ चुनी हुई साइबर सिक्योरिटी टीमों को दिया गया। ऊपर से इसने एक रोबोट को सिर्फ एक वीडियो दिखा के एक गेम सिखा दिया। और जब इसे किसी सवाल का जवाब नहीं पता होता तो यह ज्यादातर बार बातें बनाने की जगह सीधा बोल देता है मुझे नहीं पता। तो क्या Google ने सच में क्लॉड और चैट GPT को पीछे छोड़ दिया है? और उससे भी बड़ा सवाल क्या यह आपको मिलेगा भी? क्योंकि जब मैंने अपना खुद का जेमिनाई चेक किया तो वहां कुछ ऐसा दिखा जो बहुत कम लोग बता रहे हैं। इसलिए इस वीडियो में चार चीजें हैं। फर्स्ट Google ने इसे रोका क्यों? सेकंड यह सच में क्या कर सकता है? थर्ड क्लॉड और चैट जीपीटी से टक्कर में कौन जीता? एंड फोर्थ इंडिया में यह कैसे और कितने में मिलेगा। और हां, इन बड़े-बड़े नंबर्स के पीछे एक कैच भी है। जिसकी वजह से आप जो आर्गन यूज करोगे वो शायद वो आर्गन है ही नहीं जिसके नंबर्स न्यूज़ में दिखे। वो मैंने एंड के लिए बचा के रखा है। तो चलो शुरू से शुरू करते हैं। पर उससे पहले मैं हूं ऋषिकेश रॉय। एi टूल्स और ऐप बिल्डिंग को आसान भाषा में हिंदी में YouTube पे लाने वाला एक छोटा सा क्रिएटर। और यह वीडियो किसी ने स्पोंसर नहीं किया है। वैसे यह कितनी बड़ी खबर है इसका अंदाजा ऐसे लगा। फेमिनाई ऐप को हर महीने 100 करोड़ से ज्यादा लोग यूज करते हैं और अब उसी ऐप में Google का सबसे बड़ा मॉडल आ गया है। तो सबसे पहले यह आर्गन है क्या? देखो जेमिनाई Google का एi है। ठीक वैसे ही जैसे चैट GPT ओपन एi का है और क्लॉड एंथ्रोपिक का और आर्गन जेमिनाई 4 फैमिली का पहला मॉडल है। मजेदार बात यह है कि Google ने जेमिनाई 3.5 Pro का वादा किया था। मई महीने में दिखाया भी था लेकिन वह कभी आया ही नहीं और अब Google ने बोल दिया है कि वह उसे रिलीज ही नहीं करेगा। यानी Google ने बीच वाला स्टेप छोड़ के सीधा अगली जनरेशन पर छलांग लगा दी और Google के मुताबिक आर्गन उनके पिछले प्रो मॉडल से भी बड़ा मॉडल है। अब आते हैं उस हिस्से पे जिसकी वजह से इसकी इतनी चर्चा है। Google ने इसे रोका क्यों? हुआ यह कि 30 सितंबर को Google ने आर्गन अनाउंस तो किया पर यह दिया गया सिर्फ फेयरविंड नाम के प्रोग्राम के लोगों को। मतलब वो साइबर सिक्योरिटी टीमें जिनका काम ही हैकर्स से सिस्टम्स को बचाना है और इन्हें यह मॉडल बिना साइबर गार्ड रेल्स के मिला। मतलब हैकिंग से जुड़े जो रेस्ट्रिकशंस आम यूज़र्स पे लगते हैं वो इनके लिए हटा दिए गए। क्योंकि Google के ही शब्दों में आर्गन सॉफ्टवेयर में छुपी क्रिटिकल सिक्योरिटी कमियां खुद ढूंढता है, खुद चेक करता है और खुद ही पैच भी कर देता है। अब इसे ऐसे समझो एक ऐसा एक्सपर्ट जो किसी भी ताले की छुपी हुई कमी पकड़ के उसे ठीक कर देता है। बढ़िया है ना? लेकिन अगर यही एक्सपर्ट किसी चोर के हाथ लग जाए तो यानी जो स्किल आपके सिस्टम को बचाती है वही गलत हाथों में आपका सिस्टम तोड़ भी सकती है। इसीलिए मॉडल कार्ड में जो इस मॉडल की सेफ्टी रिपोर्ट है वो कैन नॉट रूल आउट वाली लाइन लिखी है और यही लाइन बायोलॉजी वाले खतरे के लिए भी। और ये डर हवा में नहीं है क्योंकि सितेंंबर में वॉलस्ट्रीट जर्नल ने एक ऐसी घटना रिपोर्ट की जो सुनके आप हैरान हो जाओगे। हुआ यह कि मई महीने के एक टेस्ट में Google का एक जेमिनाई मॉडल आर्गन नहीं कोई और। इंटरनेट पर पड़ी जानकारी से पासवर्ड का अंदाजा लगा के तीन असली कंपनीज़ के सिस्टम्स में घुस गया। और मजे की बात यह कि उसे लगा वो कंपनीज़ भी टेस्ट का ही हिस्सा है। फिर वो खुद ही रुक गया। तो अब समझ आया कि Google ने आर्गन को पहले 13 दिन सिर्फ साइबर टीमों के पास क्यों रखा? फिर 13 अक्टूबर को ये मॉडल आखिरकार बाकी लोगों के लिए खुला। जेमिनाई ऐप में, Google सर्च के एi मोड में और डेवलपर्स के लिए एपीआई पे। अब असली सवाल यह मॉडल कर क्या सकता है? पहले Google के अपने डेमोज़ देखो क्योंकि इनमें से कुछ तो सच में माइंड ब्लोइंग है। सबसे पहला वो रोबोट वाला डेमो जिसका जिक्र मैंने शुरू में किया था। हुआ यह कि आर्गन को एक वीडियो दिखाई गई जिसमें एक इंसान कॉर्न होल खेल रहा है। मतलब बीन बैट फेंक के एक बोर्ड के छेद में डालने वाला गेम। उसके बाद आर्गन ने सिर्फ उस वीडियो को देख के कंप्यूटर के अंदर इस गेम का पूरा सिमुलेशन बना दिया। उसी में रोबोट को प्रैक्टिस करवाई और फिर अपोलो 2 नाम के एक असली ह्यूमनॉइड रोबोट ने असली दुनिया में लगातार सात शॉट्स अंदर डाले और Google के मुताबिक ऐसा सिमुलेशन बनाने में पहले हफ्ते लग जाते थे। अब कुछ घंटे। हां, Google ने यह नहीं बताया कि उन सात शॉट्स से पहले कितनी कोशिशें हुई तो इसे हर बार सही मत समझ लेना। दूसरा डेमो तो और भी सीरियस है। देखो विज़ नाम की एक साइबर सिक्योरिटी कंपनी ने आर्गन से हेल्थ केयर का एक सॉफ्टवेयर चेक करवाया और आर्गन ने उसमें एक ऐसी कमी पकड़ी जिससे एक मास्टर की और एडमिन एक्सेस खुला पड़ा था और Google के मुताबिक इस फिक्स से लाखों पेशेंट्स के रिकॉर्ड्स बच गए। फिर तीसरा क्रrome जिसका कोड 4 करोड़ लाइंस का है। उसमें 60 लाख लाइंस का एक पुराना फोल्डर अलग करना डेवलपर्स के लिए महीनों का काम था जो आर्गन की मदद से हफ्तों में हो गया। और चौथा फेफड़ों की रेयर बीमारी वाले न्यूबर्न बच्चों के डीएनए डाटा में आर्गन ने एक ऐसी गड़बड़ी पकड़ी जो नॉर्मल सॉफ्टवेयर सालों से मिस कर रहा था। लेकिन यह सब Google के अपने डेमोस हैं और हर कंपनी अपने डेमो में अपना बेस्ट ही दिखाती है। तो अब देखते हैं कि जब आम लोगों ने इसे अपने हाथ में लेकर टेस्ट किया तब क्या हुआ। सबसे पहले एक इंडियन क्रिएटर कृष्ण नायक जिन्होंने आर्गन से हम्पी के विट्ठल टेंपल और मैसूर पैलेस का पूरा 3D टूर बनवाया जिसमें आप पूरा टेंपल घुमा घुमा के देख सकते हो और साथ में एक एआई गाइड भी है जो नमस्कारा आई एम रवि बोल के आपको घुमाता है। फिर दूसरे इंडियन क्रिएटर कोट बेसिक्स ने तो इससे भी आगे का काम किया। गर्मी में बाइक चलाने वालों के लिए एक कूलिंग हेलमेट का आईडिया लिया और आर्गन से उसका पूरा 3D डिजाइन और हर पार्ट की अलग 3D फाइल बनवा ली। यानी हेलमेट अभी प्रिंट नहीं हुआ है। पर उनका कहना है कि यह फाइल्स किसी 3D प्रिंटिंग वाले को दे दो तो वो असली हेलमेट बना के दे देगा। और एक क्रिएटर जस्टिन मोर ने तो बिना कोई फोटो या डाटा दिए Apple के 50 साल के कंप्यूटरटर्स का पूरा 3D म्यूजियम बनवा लिया। फोटो भी आर्गन ने खुद ढूंढी और उन्हें साफ भी खुद किया। ऊपर से यह सिर्फ कोडर्स का खेल नहीं है क्योंकि Google ने खुद जेमिनाई ऐप में दिखाया कि आप बिखरी हुई रेसिपीज, हाथ से लिखी गेस्ट लिस्ट और सीटिंग चार्ट की फोटो डालो और आर्गन उनसे पूरी प्रपोजल डेक, ईमेल का ड्राफ्ट और एक ट्रैकर बना देता है। हां, इनमें से कई क्रिएटर्स को यह मॉडल लॉन्च से पहले मिल गया था, तो यह उनके बेस्ट रिजल्ट्स हैं। पर हैं असली लोगों के असली काम। और अगर यह सब देख के आपका भी मन कर रहा है कि एi से अपना खुद का ऐप बनाओ। वो भी बिना कोडिंग सीखे। तो इस संडे भी एक बूट कैंप है। उसमें हम बिल्कुल शुरू से ऐप बनाते हैं और उसे Play Store तक ले जाते हैं। उसका लिंक डिस्क्रिप्शन में है। अब बात आर्गन की उस क्वालिटी की जो मुझे इस पूरे लॉन्च में सबसे इंटरेस्टिंग लगी। मुझे नहीं पता वाली बात। देखो आर्टिफिशियल एनालिसिस नाम की एक इंडिपेंडेंट कंपनी एआई मॉडल से बहुत मुश्किल फैक्ट्स वाले सवाल पूछती है और देखती है कि जवाब ना पता हो तो मॉडल मान लेता है या अपनी तरफ से जवाब बना देता है जिसे एआई की भाषा में हैलसिनेशन कहते हैं और इस टेस्ट में जब जवाब नहीं पता था तब आर्गन ने सिर्फ 15% बार बात बनाई जबकि ओपन एआई के जीपीटी6 एस्ट्रा ने 51% बार यानी लगभग आधी बार। अब इसे ऐसे समझो। नेगेटिव मार्किंग वाले एग्जाम में एक स्टूडेंट है जिसे सवाल नहीं आता तो वो उसे छोड़ देता है। और दूसरा जो हर सवाल पर गेस मार देता है। तो आर्गन वो पहला वाला स्टूडेंट है। लेकिन यहां एक ट्विस्ट है जो ज्यादातर वीडियोस में नहीं बताया जा रहा। उसी टेस्ट में सही जवाब देने में एस्ट्रा आगे है 63% के साथ और आर्गन सिर्फ 50% पे। मतलब आर्गन जानता थोड़ा कम है पर बातें भी कम बनाता है। और जब आप एi से बिजनेस, पैसों या हेल्थ जैसी जरूरी चीज पूछते हो तब एक गलत पर कॉन्फिडेंट जवाब मुझे नहीं पता से कहीं ज्यादा भारी पड़ता है। तो अब वो सवाल जिसका सबको इंतजार है। क्या आर्गन ने क्लॉड और चैट जीपीटी को पीछे छोड़ दिया? सच यह है कि यह इस पे डिपेंड करता है कि आप स्कोरबोर्ड कौन सा देख रहे हो? तो मैं आपको तीन स्कोरबोर्ड्स दिखाता हूं। पहला आर्टिफिशियल एनालिसिस का इंटेलिजेंस इंडेक्स। यहां नंबर वन पे है क्लड ओपस 5.5 58 पॉइंट्स के साथ और आर्गन 53 पॉइंट्स पे है। लगभग जीपीटी6 astra के बराबर। दूसरा वेल्स इंडेक्स जो फाइनेंस लीगल और टैक्स जैसे असली ऑफिस वाले कामों पे मॉडल्स को टेस्ट करता है। और यहां आर्गन नंबर वन है। क्लाउड ओपस और Sonet दोनों से आगे। और तीसरा एरीना जहां आम लोग बिना मॉडल का नाम देखे दो जवाबों में से बेहतर वाला चुनते हैं। यहां भी आर्गन टेक्स्ट में नंबर वन पर पहुंचा। पर यह रैंकिंग अभी शुरुआती है। बहुत कम वोट्स पर बनी है। अब कोडिंग की बात करें तो यहां क्लॉड का पलड़ा अभी भी भारी है। क्योंकि खुद Google की अपनी टेबल में टर्मिनल बेंच नाम के बड़े कोडिंग टेस्ट में क्लॉड ओपस 5.5 आगे है। और याद है मैंने बोला था कि आर्गन बातें कम बनाता है। तो कोड में कहानी थोड़ी उल्टी निकली। हुआ यह कि थियो नाम के एक बड़े डेवलपर ने इसे अपने असली कोड पर टेस्ट किया और उनके टेस्ट में आर्गन ने उस कोड के बारे में 36 बातें बताई जिनमें से 24 गलत निकली और उन्होंने साफ लिखा कि असली कोड के काम के लिए यह आउटराइट अनयूजेबल है। ऊपर से ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में Google के ही कुछ एंप्लाइजस ने कहा कि असली कोडिंग में यह अपने नंबर्स जितना अच्छा नहीं। हालांकि Google ने इसे गलत बताया। तो सारे टेस्ट देख के सिंपल वर्डिक्ट यह निकलता है कोडिंग के लिए अभी भी क्लॉट लेकिन डॉक्यूमेंट्स, रिसर्च, डाटा, लंबी वीडियोस और फैक्ट्स वाले ऐसे सवाल जहां एक गलत जवाब महंगा पड़ेगा वहां आर्गन सच में बहुत स्ट्रांग है। अब सबसे जरूरी हिस्सा, इंडिया में यह आपको मिलेगा कैसे? और यहीं आती है वो बात जो मैंने शुरू में बोली थी। मैंने अपना जेमिनाई खोला, मॉडल वाली लिस्ट खोली और वहां आर्गन था ही नहीं। बस फ्लैश, थिंकिंग और प्रो और साथ में अपग्रेड का बटन। फिर मैंने Google AI स्टूडियो खोला जहां लोग अक्सर Google के लेटेस्ट मॉडल्स फ्री में ट्राई कर लेते थे और वहां साफ लिखा था अपग्रेड टू अनलॉक जेमिनाई 4 आर्गन। यह सिर्फ Google AI अल्ट्रा प्लान में मिलेगा या फिर एपीआई की से पैसे देकर। यानी इस बार फ्री में ट्राई करने वाला वो पुराना रास्ता बंद है। तो अब देखो इंडिया के प्राइसेस सीधा Google की अपनी पेज से। फ्री प्लान में आर्गन नहीं और ₹399 वाले AI प्लस में भी नहीं। असल में आर्गन शुरू होता है AI Pro से जो ₹1950 महीने का है और AI अल्ट्रा जो ₹6500 महीने से शुरू होता है उसमें सबसे ज्यादा लिमिट मिलती है। और स्टूडेंट्स ध्यान दो Google का स्टूडेंट्स वाला फ्री ऑफर AI प्लस का है। Pro का नहीं तो उसमें आर्गन नहीं मिलेगा। लेकिन अब एक ऐसा रास्ता जो शायद आपके पास पहले से है और आपको पता भी नहीं। Jio देखो Jio पिछले साल से अपने यूज़र्स को 18 महीने का Google AI Pro फ्री दे रहा है और AI Pro में अब आर्गॉन आता है। बस शर्त यह है कि Jio सिम हो, उम्र 18 साल से ऊपर हो और ₹349 या उससे ऊपर का अनलिमिटेड 5G प्लान चालू हो। फिर MyJio ऐप खोलो। ऊपर Google जेमिनाई ऑफर वाले बैनर पर टैप करो। अपनी Gmail आईडी से रजिस्टर करो। Google वन की पेज पर ऑफर एक्टिवेट करो और उसी Gmail से जेमिनाई खोलो। पर जल्दी करना क्योंकि Jio की टर्म्स के हिसाब से यह ऑफर 29 अक्टूबर तक ही है। और हां Jio की पेज पे अभी आर्गॉन का नाम नहीं लिखा है। पर ऑफर Google AI Pro का है और Google खुद कहता है कि AI Pro वालों को आर्गॉन मिलता है। तो जिन्होंने यह ऑफर पहले ले रखा है वो भी एक बार अपना जेमिनाई चेक कर लो। अब मान लो प्रो आ गया। तो जेमिनाई ऐप में नीचे चैट बॉक्स में जो मॉडल का नाम लिखा है उस पे टैप करो। लिस्ट में से फोर आर्गॉन चुनो और वहीं थिंकिंग लेवल दिखेगा। लो, मीडियम और हाई। बस इसे याद रखना क्योंकि यही उस कैच से जुड़ा है जो मैंने एंड के लिए बचा के रखा है और लिमिट की बात करें तो वह हर 5 घंटे में रिफ्रेश होती है। ऊपर से एक वीकली लिमिट भी है और लिमिट खत्म होते ही जेमिनाई एक छोटे मॉडल पे चला जाता है। तो अब वो कैच जिसका मैंने शुरू में वादा किया था। याद है वो सारे बड़े-बड़े नंबर्स वेल्स पे नंबर वन, एरीना पे नंबर वन, आर्टिफिशियल एनालिसिस के स्कोर्स? दरअसल वो सारे नंबर्स आर्गन के हाई थिंकिंग लेवल पर निकाले गए हैं। लेकिन Google की अपनी हेल्प पेज कहती है जेमिनी ऐप में अगर आप थिंकिंग लेवल नहीं चुनते तो वो डिफॉल्ट लो पे चलता है। यानी अगर आपने बस आर्गन चुना और सवाल पूछ लिया तो जो आर्गन आपके सामने है वो शायद वो आर्गन नहीं जिसके नंबर्स आपने न्यूज़ में देखे। तो फिक्स सिंपल है। कोई भी जरूरी काम हो जैसे कोई डॉक्यूमेंट चेक करना, कोई रिसर्च या कोई मुश्किल सवाल तो थिंकिंग लेवल हाई कर दो। पर हाई की भी एक कीमत है क्योंकि Google ने खुद लिखा है कि ज्यादा थिंकिंग लेवल आपकी लिमिट ज्यादा खाता है और आर्गन वैसे भी बहुत सोचने वाला मॉडल है। आर्टिफिशियल एनालिसिस के टेस्ट्स में इसने एक ही काम के लिए GPT6 एस्ट्रा से दुगने से भी ज्यादा टोकंस खर्च किए। इसीलिए छोटे-मोटे कामों के लिए लो ठीक है और हाई तब जब काम सच में बड़ा हो और डेवलपर्स के लिए एक बात एपीआई का इंट्रोडक्टरी प्राइस 30 नवंबर तक ही है। फर्स्ट दिसंबर से यह डबल हो जाएगा। तो सब मिलाकर क्या आर्गन सच में इतना बड़ा डील है? हां, है क्योंकि मुझे नहीं पता बोलना शायद एi की सबसे काम की क्वालिटी है। बस कोडिंग में अभी भी क्लॉड आगे है। अब कमेंट में मुझे बताओ आप आर्गन से सबसे पहले क्या करवाओगे? और अगर आप Jio वाले हो तो चेक करके बताओ कि आपके जेमिनाई में आर्गन आया या नहीं। इससे बाकी लोगों की भी मदद होगी। वैसे कमेंट्स मैं खुद पढ़ता हूं और रिप्लाई भी करता हूं। वो मैं एआई से नहीं करता। अगर यह वीडियो काम की लगी तो लाइक कर दो ताकि यह उन लोगों तक भी पहुंचे जिन्हें Jio वाला यह ऑफर पता ही नहीं। साथ ही अगर जानना है कि ओपन AI का GPT6 Astra जिससे आर्गन की असली टक्कर है उसमें कितना दम है तो उसकी पूरी वीडियो स्क्रीन पे है वो जरूर देखो। और हां इस संडे भी एक बूट कैंप है। उसका लिंक डिस्क्रिप्शन में है। तो अब इस भाई को इजाजत दीजिए। दैट्स ऑल गाइस। मिलते हैं अगली वीडियो में।

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Assuntos: Assistente pessoal. Publicado no YouTube em 2026-10-16.

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