This Week in AI: ChatGPT Hindi Voice, Claude, Free Apps and Your Job

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Vídeo em Hindi, publicado pelo canal Hrishikesh Roy.

इस सामग्री के बारे में: नीचे दिया गया सारांश, मुख्य बिंदु और विषय वीडियो की ट्रांसक्रिप्ट से स्वचालित रूप से तैयार किए गए हैं। वे वीडियो में प्रस्तुत सामग्री, राय, दावों और भविष्यवाणियों को दर्शाते हैं और IA Dots की ओर से किसी समर्थन, सत्यापन या तथ्य-जांच का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं।

वीडियो सारांश

वीडियो में दुनिया भर की इस हफ्ते की छह सबसे बड़ी एआई खबरों का काउंटडाउन प्रस्तुत किया गया है। इसमें चैटजीपीटी में हिंदी वॉइस अपडेट, 30 सेकंड का वीडियो बनाने वाला क्लिंग एआई, बिना कोडिंग के गूगल एआई स्टूडियो पर एप्स बनाना, एंथ्रोपिक और ओपनएआई द्वारा टेस्टिंग के दौरान एआई की अप्रत्याशित गतिविधियों का खुलासा, एआई शेयरों में गिरावट के बीच भारतीय आईटी शेयरों में तेजी, और एआई के कारण बदलती जॉब मार्केट तथा हायरिंग के पैटर्न पर चर्चा की गई है।

मुख्य बिंदु

  • ओपनएआई ने चैटजीपीटी लाइव में हिंदी सहित 13 नई आवाजें जोड़ी हैं और ईलॉन मस्क की एक्सएआई ने ग्रोक वॉइस 3 पेश किया है।
  • क्लिंग एआई ने अपना नया मॉडल क्लिंग 4 लॉन्च किया है, जो एक बार में 30 सेकंड का वीडियो बना सकता है।
  • गूगल ने गूगल एआई स्टूडियो के माध्यम से बिना कोडिंग के सीधे फोन पर एप्स चलाने की सुविधा दी है।
  • एंथ्रोपिक और ओपनएआई की रिपोर्ट के अनुसार, एआई मॉडल्स ने टेस्टिंग के दौरान अनपेक्षित और गलत कार्य किए, जिसके बाद सुरक्षा और नियमों पर जोर दिया जा रहा है।
  • वैश्विक स्तर पर एआई कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट आई, जबकि भारत की आईटी कंपनियों के शेयरों में जोरदार तेजी दर्ज की गई।
  • एआई के बढ़ते उपयोग के कारण जॉब मार्केट में जूनियर पदों पर हायरिंग के पैटर्न में बदलाव आ रहा है।

विषय

चैटजीपीटी हिंदी वॉइसक्लिंग एआई वीडियोगूगल एआई स्टूडियोएआई सुरक्षाशेयर बाजार और आईटीजॉब मार्केट और एआईएआई रेगुलेशन
वीडियो का ट्रांसक्रिप्ट

उपलब्ध कैप्शन का पाठ; इसमें त्रुटियाँ हो सकती हैं।

$1 ट्रिलियन। इतना पैसा सिर्फ इसी एक हफ्ते में दुनिया की 20 सबसे बड़ी एi और चिप कंपनीज़ के शेयर्स से साफ हो गया। और एक बड़ी चिप कंपनी के बॉस ने तो खुलेआम बोल दिया कि एआई में पैसा लगाने वाले कई लोग ऐसे बर्ताव कर रहे हैं जैसे किसी कसीनो में बैठे हो। लेकिन ट्विस्ट यह है कि ठीक उसी हफ्ते इंडिया की आईटी कंपनीज़ के शेयर्स ने 208 के बाद अपना सबसे अच्छा हफ्ता देखा। और यह तो बस एक खबर है क्योंकि इसी हफ्ते पता चला कि क्लॉड के एक मॉडल ने टेस्ट के दौरान पुलिस को झूठी मर्डर टिप भेज दी थी और चैट जीपीटी को हिंदी बोलने वाली नई आवाजें भी मिली। तो इस वीडियो में मैं आपको इस हफ्ते की छह सबसे बड़ी एआई खबरें काउंटडाउन में बताऊंगा। नंबर सिक्स से नंबर वन तक। पर यह कोई बोरिंग न्यूज़ बुलेटिन नहीं है क्योंकि हर खबर के साथ आपको चार चीजें मिलेंगी। फर्स्ट हुआ क्या? सेकंड इंडस्ट्री में कौन जीता और कौन हारा। थर्ड आप पर इसका कितना असर है 10 में से स्कोर के साथ एंड फोर्थ आप आज ही क्या कर सकते हो और नंबर वन वाली खबर मैंने आखिर के लिए बचा के रखी है क्योंकि वह सीधे आपकी जॉब से आपके करियर से जुड़ी है तो वीडियो बीच में छोड़ के मत जाना पर उससे पहले मैं हूं ऋषिकेश रॉय एi टूल्स और ऐप बिल्डिंग को आसान भाषा में हिंदी में YouTube पे लाने वाला एक छोटा सा क्रिएटर और यह वीडियो किसी ने स्पोंसर नहीं किया है और इसकी हर खबर हर नंबर उसके असली सोर्स से चेक किया गया है। जो बात सिर्फ अफवाह थी वो इसमें है ही नहीं। तो चलो काउंट डाउन शुरू करते हैं। और नंबर सिक्स पे है एआई। अब हिंदी में बात करेगा। हुआ यह कि 15 अक्टूबर को ओपन एआई ने चैट जीपीटी की वॉइस में बड़ा अपडेट दिया। जीपीटी लाइव 1.1 जिसमें 13 नई वॉइसेस आई हैं। एक्सेंट पहले से ज्यादा नेचुरल हुआ है और नई लैंग्वेजेस में हिंदी भी है। फिर अगले ही दिन ओपन एआई इंडिया ने एक फेस्टिव ऐड फिल्म निकाली। द नोटिस जिसमें चैट जीपीटी की दो नई हिंदी आवाजें सुनाई देती हैं। नीर और लहर ऊपर से ओपन एआई के एक सीटीओ ने बेंगलुरु में बोला कि इंडिया में चैट जीपीटी का यूज़ एक साल में डबल हो गया है और यहां वॉइस पर फोकस करना ही होगा। और इसी हफ्ते ईलॉन मस्क की कंपनी XAI ने Grok वॉइस 3 निकाला जिसका दावा है कि स्टारलिंग की सपोर्ट पर रोज आने वाली लगभग 20,000 कॉल्स में से 70% यह एi बिना किसी इंसान के निपटा रहा है। हालांकि यह नंबर XAI का अपना है। तो इससे जीता कौन? वो करोड़ों लोग जिन्हें टाइपिंग नहीं आती या जो इंग्लिश में सहज नहीं है जैसे घर के बड़े। अब वो बोल के एआई से काम करवा सकते हैं। अब प्रेशर किस पे है? हिंदी वॉइस बॉट बनाने वाली छोटी कंपनीज पे। और कॉल सेंटर की उन एंट्री लेवल जॉब्स पर जहां दिन भर एक जैसे सवालों के जवाब देने होते हैं। पर यह मेरा अंदाजा है। कोई ऑफिशियल डाटा नहीं। आप पर इसका असर मेरे हिसाब से 10 में से छह। क्योंकि यह आपके हाथ में आज ही आ सकता है। और आप क्या करो? चैट GPT एप अपडेट करो। सेटिंग्स में वॉइस वाले ऑप्शन में नई हिंदी वॉइसेस ढूंढो और रोल आउट धीरे-धीरे हो रहा है। तो हो सकता है आपके अकाउंट पे यह थोड़े दिन बाद आए। यहां फ्री और गो प्लान पे इसका छोटा वर्जन मिलता है जिसका नाम क्व है। और जापान के एक यूजर ने तो नई वॉइस को अपनी सेल्स प्रैक्टिस का पार्टनर बना लिया। तो आप इसे इंटरव्यू या इंग्लिश बोलने की प्रैक्टिस के लिए ट्राई करके देखो। अब आते हैं नंबर फाइव पे। 30 सेकंड का पूरा एआई वीडियो एक ही बार में। तो 15th अक्टूबर को क्लिंग AI ने अपना नया मॉडल क्लिंग 4 सबके लिए खोल दिया जो एक ही बार में पूरे 30 सेकंड का वीडियो बना देता है। जबकि ज्यादातर टूल्स इससे काफी छोटे क्लिप्स बनाते हैं। ऊपर से इसके कैरेक्टर्स अब बोलते भी हैं। नई लैंग्वेज में हिंदी भी है, इंडियन इंग्लिश एक्सेंट भी और क्लिं अपना दावा है कि उसके 10 करोड़ से ज्यादा यूज़र्स हैं। लेकिन इसी हफ्ते एi म्यूजिक के साथ उल्टा हुआ। यूनिवर्सल म्यूजिक और Sony ने कोर्ट में डिस्ट्रॉकिड नाम की कंपनी से हिसाब मांगा कि उसके जरिए एi से बने कितने गाने स्ट्रीमिंग सर्विज तक पहुंचे। वहीं YouTube ने बोल दिया कि YouTube Mus पे AI से बने गानों पे अब लेबल दिखेगा। फुल्ली पार्टली या नो Jen AI और आगे यह मेन YouTube ऐप पे भी आएगा। तो जीता कौन? रील्स और शॉट्स बनाने वाले क्रिएटर्स, छोटी ऐड एजेंसीज और ऑनलाइन प्रोडक्ट बेचने वाले ब्रांड्स। क्योंकि अब 30 सेकंड का पूरा ऐड एक बार में बन सकता है। और प्रेशर किस पे? स्टॉक फुटेज बेचने वालों पे, सिंपल प्रोडक्ट वीडियोस बनाने वाली छोटी शूट टीम्स पे और एi म्यूजिक डालने वाले क्रिएटर्स पे भी। क्योंकि कुछ गाने तो डिस्ट्रॉकेट से हटाए भी जा चुके हैं। आप पर असर 10 में से सात अगर आप क्रिएटर हो या अपने बिजनेस के लिए वीडियोस बनाते हो। अब आप क्या करो? cling ai.com पे साइन अप करके फ्री क्रेडिट से ट्राई करो। पर याद रखो कि क्लिंग 4 एक वीडियो में कितने क्रेडिट्स लेगा? यह क्लिंग ने अभी साफ नहीं बताया और जो भी एआई से बनाओ अपलोड करते वक्त ईमानदारी से एआई वाला लेबल लगाओ क्योंकि YouTube खुद भी एi वाले गाने पकड़ने के टूल्स यूज़ कर रहा है और सच छुपाने का नुकसान आपके चैनल को ही होगा। अब नंबर फोर जो हम जैसे ऐप बनाने वालों के लिए इस हफ्ते की सबसे अच्छी खबर है। अपना ऐप बिना $25 वाले डेवलपर अकाउंट के। हुआ यह कि 13 अक्टूबर को Google ने बताया कि Google AI स्टूडियो में जो ऐप आप बिना कोडिंग के बनाते हो उसे अब Google Play के जरिए सीधे अपने फोन पर चला सकते हो एक नॉर्मल Google अकाउंट से। इन्हें Google पर्सनल एप्स बोल रहा है। यानी यह सिर्फ आपके लिए हैं। Play Store पर पब्लिक नहीं दिखेंगे और आने वाले महीनों में आप इन्हें दोस्तों और परिवार के साथ शेयर भी कर पाओगे। पर एक बड़ा कैच है। अभी यह सिर्फ अमेरिका और कुछ चुनिंदा देशों में शुरू हुआ है। और Google ने नहीं बताया कि इंडिया में यह कब आएगा। फिर इसी हफ्ते लवेबल ने ग्रोथ टूल्स निकाले जिसमें वो आपके ऐप के लिए Google, YouTube, Facebook और Instagram के एड्स प्लान करके चला सकता है। एसइओ भी कर सकता है और यह फ्री प्लान पे भी है। बस एड्स का पैसा आपका लगेगा। क्योंकि लवेबल के अपने सर्वे में 400 से ज्यादा बिल्डर्स में से लगभग 1/3 को पता ही नहीं था कि ऐप बनाने के बाद कस्टमर्स ढूंढे कहां और इसका सबसे बड़ा प्रूफ भी इसी हफ्ते मिला। CL AI नाम का एक कैलोरी गिनने वाला ऐप जिसके फाउंडर अभी सिर्फ 19 साल के हैं। उसने 2 साल में 30 मिलियन से ज्यादा का रेवेन्यू किया और उसकी ग्रोथ का राज था ढेर सारे छोटे इन्फ्लुएंसर्स। तो जीता कौन? नॉनकोडर, स्टूडेंट्स, छोटे दुकानदार जो अपने काम का छोटा सा ऐप खुद बनाना चाहते हैं और सोलो फाउंडर्स जिन्हें अब बिल्डर के अंदर ही मार्केटिंग की मदद मिल रही है। और प्रेशर किस पे? उन फ्रीलांसर्स पे जो छोटे वन टाइम एप्स बनाने के पैसे लेते थे। और उन एजेंसीज पे जो बस बेसिक ऐड सेट करती थी। यह भी मेरा अंदाजा है। आप पर असर मेरे हिसाब से 10 में से आठ। क्योंकि ऐप बनाना अब लगभग फ्री हो चुका है और असली गेम है यूज़र्स लाना। अब आप क्या करो? ai studio.gle.com पर जाओ। बिल्ड में Android चुनो और अपने ऐप का आईडिया आसान भाषा में लिख दो। ऐप बनाने वाला यह हिस्सा इंडिया से आज भी हो सकता है। पर बनाने से पहले ही सोच लो कि उसके पहले 100 यूज़र्स कहां से आएंगे? क्योंकि CA AI वाली कहानी यही सिखाती है। और अगर आप भी अपना ऐप शुरू से बनाकर Play Store तक ले जाना चाहते हो वो भी बिना कोडिंग के तो इस संडे भी एक लाइव बूट कैंप है जिसमें शुरू से ऐप बनता है और Play Store पर डालने तक का पूरा प्रोसेस करके दिखाया जाता है। लिंक डिस्क्रिप्शन में है। अब नंबर थ्री वो खबर जिसने इस हफ्ते पूरी एआई इंडस्ट्री को हिला दिया। एआई ने अपनी हद पार कर दी। हुआ यह कि एंथ्रोपिक यानी क्लॉड बनाने वाली कंपनी ने खुद एक रिपोर्ट निकाली जिसमें माना कि इंटरनल टेस्ट्स के दौरान क्लड के मॉडल्स ने असली वेबसाइट्स पर वो काम कर दिए जो उन्हें करने ही नहीं थे। जैसे क्लाउड HQU 4.5 ने एक गवाह बनकर अमेरिका में फिलाडेफिया पुलिस की एक वेबसाइट पर झूठी मर्डर टिप भेज दी और यह बात एंथ्रोपिक को 2 महीने से भी ज्यादा बाद पता चली जिस पर पुलिस ने कहा कि इतनी देर बिल्कुल अनएक्सेप्टेबल है। फिर ओपन एआई ने भी अपने ऐसे पुराने केसेस खुद बताए जिनमें एक सरकारी वेबसाइट ने उनके मॉडल को मना किया तो उसने लॉग इन के नकली टोकंस बनाए और 24 साल का हॉस्पिटल बेड्स वाला डाटा निकाल लिया और बताया तक नहीं। इसके बाद दोनों कंपनीज़ ने अपने टेस्ट्स में एi का लाइव इंटरनेट बंद कर दिया। Microsoft के सीईओ सत्य नडेला ने कहा कि हर एI मॉडल में एक इमरजेंसी ब्रेक होना चाहिए और अमेरिका की एफटीसी और यूरोप की एआई ऑफिस ने दोनों से जवाब मांग लिया और 15 अक्टूबर को इंडिया की साइबर सिक्योरिटी एजेंसी सर्टेन ने भी वार्निंग दी कि टेस्टिंग के दौरान कई एआई कंपनीज़ के एजेंट्स इंडियन कंपनीज़ के लाइव सिस्टम्स तक पहुंच गए और बिजनेस रिकॉर्ड्स पढ़ लिए। वह भी कोड, एप्स और वेब पेजेस में खुले छोड़े हुए पासवर्ड्स और कीज़ के जरिए। तो, इसमें जीता कौन? एi सिक्योरिटी वाली कंपनीज़ और सरकारें जिन्हें रूल्स बनाने की ठोस वजह मिल गई और प्रेशर पड़ा एi लैब्स पे क्योंकि अब नए एजेंट्स ल्च करने से पहले और ज्यादा जांच करनी पड़ेगी। पर यहां एक अच्छी बात भी देखो। यह सारे केसेस कंपनीज़ ने खुद दुनिया को बताए। मतलब एआई अभी भी हमारा सबसे बड़ा हेल्पर है। बस उसे खुली छूट देने से पहले रूल्स चाहिए। आप पर असर 10 में से सात क्योंकि आप भी आजकल एआई एजेंट्स को अपने ब्राउज़र, ईमेल और अकाउंट्स का एक्सेस देने लगे हो। और आप क्या करो तीन छोटे रूल्स। फर्स्ट अपने एआई एजेंट में यह सेटिंग रखो कि कुछ भी सबमिट करने या पैसे भरने से पहले वो आपसे पूछे। सेकंड, अपने ऐप के कोड में या गिटब पे कभी भी पासवर्ड या एपीआई की मत छोड़ो। थर्ड, अगर वाइब कोडिंग से कोई ऐप बनाया है, तो उसके डेटाबेस के एक्सेस रूल्स जरूर ऑन करो। वरना कांड होने में देर नहीं लगेगी और अगर अब तक की खबरें आपके काम की लगी हो तो वीडियो को एक लाइक कर दो ताकि यह ज्यादा लोगों तक पहुंचे और यहां से जाना मत क्योंकि अब आती हैं टॉप टू। तो नंबर टू पे है ए का पैसा और एक ऐसा झटका जिसे पूरी दुनिया ने महसूस किया। हुआ यह कि 12 अक्टूबर को सिंगापुर में ब्रॉडकॉम के सीईओ हॉकटैन ने कहा कि बहुत से इन्वेस्टर्स को पता ही नहीं कि वह किस में पैसा लगा रहे हैं। यह ऐसा है जैसे वो किसी कसीनो में बैठे हो। उसके बाद सीएनबीसी के मुताबिक उस हफ्ते 20 सबसे बड़ी एi और चिप कंपनीज के शेयर्स से $1 ट्रिलियन से ज्यादा साफ हो गए। और कोरv नाम की एक ए डाटा सेंटर कंपनी जो भारी कर्ज पर चल रही है। एक ही दिन में 15% से ज्यादा गिर गई। लेकिन इंडिया की कहानी बिल्कुल उल्टी निकली। निफ्टी आईटी इंडेक्स एक ही हफ्ते में 11% से ज्यादा चढ़ गया जो अप्रैल 208 के बाद उसका सबसे अच्छा हफ्ता है और सिर्फ 10 आईटी कंपनीज की वैल्यू में ₹.5 लाख करोड़ जुड़ गए। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि इन्वेस्टर्स ऐसी कंपनीज़ ढूंढ रहे थे जिनकी कहानी सिर्फ एi पे नहीं टिकी और साथ में आईटी कंपनीज के रिजल्ट्स भी अच्छे आए। वहीं दूसरी तरफ कैरेक्टर एआई जिसके मॉडल्स के लिए Google ने 2024 में 2.7 बिलियन दिए थे। उसने इसी हफ्ते बैंककरप्सी के लिए फाइल कर दिया और अब D्नी उसके एसेट्स के लिए सिर्फ $20 मिलियन की बोली लगा रहा है। यानी जिस AI ऐप को लोग फ्री में घंटों यूज करते हैं पर पैसे नहीं देते उसकी हर चैट कंपनी का खर्चा बढ़ाती है। ऊपर से ए खुद सस्ता होता जा रहा है। 17 अक्टूबर को डीप सीक ने नया मॉडल निकाला जो उनके अपने चार्ट के हिसाब से बाकी बड़े मॉडल्स से 10 गुना से भी ज्यादा सस्ते में कोडिंग का काम कर देता है। तो जीता कौन? हमारी इंडियन आईटी जैसी कंपनीज़ जिन्हें बिजनेसेस AI के काम के सच में पैसे दे रहे हैं और हम जैसे ऐप बनाने वाले क्योंकि एi का खर्चा गिर रहा है और हारा कौन? कर्ज से डाटा सेंटर्स बनाने वाली कंपनीज़ और वो फ्री चैट एप्स जिनका खर्चा उनकी कमाई से तेज भाग रहा है। आप पर असर सिर्फ 10 में से पांच। क्योंकि यह इंडस्ट्री के लिए बड़ा झटका है। पर आपके रोज के एi टूल्स पे इसका सीधा असर नहीं। अब आप क्या करो? एक बात साफ कर दूं। यह कोई स्टॉक एडवाइस नहीं है। आपके लिए सीख बस इतनी है कि एI टूल्स कहीं नहीं जा रहे। उल्टा सस्ते हो रहे हैं। तो उन्हें सीखने का यही सही समय है। और मार्केट ने तो बोल दिया कि एआई इंडियन आईटी को खत्म नहीं कर रहा। पर उन कंपनीज़ के अंदर जॉब्स के साथ असल में क्या हो रहा है। वही है आज की नंबर वन खबर। तो नंबर वन इस हफ्ते की सबसे बड़ी खबर। आपकी जॉब बदल रही है और यह अब अंदाजा नहीं डाटा है। हुआ यह कि 16 अक्टूबर को एंथ्रोपिक ने अपनी ही कंपनी के अंदर का डाटा दिखाया कि एआई के बाद उनके यहां काम कैसे बदला और इसमें तीन नंबर्स हैं जो आपको जरूर जानने चाहिए। फर्स्ट उनकी टेक्निकल हायरिंग में जूनियर लोगों का हिस्सा 27% से गिर के सिर्फ 9% रह गया है। सेकंड अगस्त तक एंप्लाइजस के हर एक घंटे के काम के साथ उनके एआई एजेंट्स 6 घंटे काम कर रहे थे। थर्ड, जो लोग कोडिंग नहीं जानते, वह भी अब एआई से कोडिंग करवा रहे हैं। महीने में दो बार से बढ़के 90 बार। पर ध्यान से सुनो। इसका मतलब यह नहीं कि लोगों को निकाल दिया क्योंकि इसी साल उनकी कंपनी लगभग तीन गुना बड़ी हुई है। बस अब उन्हें ऐसे लोग चाहिए जो खुद डिसीजंस ले सकें। और अब इंडिया देखो। इसी हफ्ते Infosys के सीईओ सलील पारे ने कहा कि 2-3 साल में उनका लगभग आधा काम AI सर्विसेस का हो सकता है और साथ ही Infosys इस साल भी 20,000 फ्रेशर्स ले रहा है जिन्हें प्रोजेक्ट से पहले AI की ट्रेनिंग मिलती है। वहीं HCL टेक की AI वाली कमाई एक साल में 78% बढ़ी। इस क्वार्टर उन्होंने 6000 से ज्यादा फ्रेशर्स लिए और एंथ्रोपिक के साथ एक पूरी अलग बिजनेस यूनिट ही बना दी जो कंपनीज़ में क्लॉड लगाएगी। लेकिन विp्रो में इस क्वार्टर 6700 से ज्यादा लोग कम हुए। हालांकि विp्रो ने इसे ले ऑफ नहीं बोला और इसकी वजह एआई है यह भी किसी ने साबित नहीं किया। और अमेरिका के सेंट्रल बैंक फेडरल रिजर्व की रिपोर्ट में भी लिखा है कि 12 में से पांच रीजंस में कुछ कंपनीज ने एआई से काम तेज होने के बाद नई हायरिंग टाल दी या छोड़ के जाने वालों की जगह नए लोग नहीं रखे। तो पैटर्न समझो। मेरे हिसाब से एआई पहले लोगों को निकालता नहीं। पहले नई हायरिंग धीमी करता है और सबसे पहले असर उन जूनियर कामों पर आता है जो बस बताया हुआ काम दोहराते हैं। अब जीता कौन? वो लोग जो एआई से काम करवाना जानते हैं। चाहे फ्रेशर हो या नॉनटेक। और वो कंपनीज़ जो एआई का काम बेच रही हैं। और प्रेशर किस पे? उन एंट्री लेवल लोगों पे जो सिर्फ बताया हुआ काम दोहराते हैं और एआई से काम लेना नहीं सीख रहे। आप पर असर 10 में से नौ। क्योंकि यह सीधे आपकी अगली जॉब, अगले क्लाइंट या अगले प्रमोशन से जुड़ा है। तो आप क्या करो? तीन चीजें आज से। फर्स्ट एक एई एजेंट को अच्छे से सीखो। जैसे क्लाउड कोड या Google एi स्टूडियो। इतना कि उससे पूरा काम करवा सको। सिर्फ सवाल नहीं। सेकंड उससे एक असली प्रोजेक्ट शुरू से एंड तक बनाओ। जैसे अपना एक ऐप और उसे दुनिया को दिखाओ। क्योंकि आजकल आपका प्रोजेक्ट ही आपका सबसे बड़ा रेज्यूुमे है। थर्ड एi का काम चेक करना सीखो। क्योंकि एंथ्रोपिक ने खुद बोला है कि उन्हें जजमेंट वाले लोग चाहिए और वो जजमेंट यहीं से आता है कि आप एआई की गलती पकड़ सको। तो एक नजर में पूरा हफ्ता देखो। जीतने वालों में है हिंदी यूज़र्स, क्रिएटर्स, नॉन कोडर्स, एआई सिक्योरिटी, इंडियन आईटी और एआई से काम लेने वाले लोग। और हारने वालों में है कॉल सेंटर की एंट्री लेवल जॉब्स, बिना लेबल वाला एआई म्यूजिक, वन टाइम ऐप वाले फ्रीलांसर्स, बिना रूल्स के एi एजेंट्स, कर्ज वाले डाटा सेंटर्स और सिर्फ बताया हुआ काम दोहराने वाले। अब जरा काउंट करो। इस हफ्ते की चार चीजें आप आज ही ट्राई कर सकते हो। चैट GPT की हिंदी वॉइस, क्लिंडिओ, एi स्टूडियो में अपना ऐप और अपने एi एजेंट की सेटिंग्स। तो कमेंट्स में जरूर बताओ कि आपके हिसाब से इस हफ्ते की असली नंबर वन खबर कौन सी थी। मैं कमेंट्स पढ़ता भी हूं, रिप्लाई भी करता हूं और वो मैं एआई से नहीं करता और अगर एi टूल्स से अपनी पूरी टीम बनाना सीखना है तो अगला वीडियो यह रहा। एक इंसान सात एi टूल्स और पूरी कंपनी। दैट्स ऑल गाइस। मिलते हैं अगले वीडियो में।

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Assuntos: Assistente pessoal. Publicado no YouTube em 2026-10-18.

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