Threat of AI Agents and Cyber Attacks: HOW DO WE STOP THE AI THREAT? Cyber Alert | Mamta Chopra
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Vídeo em Hindi, publicado pelo canal DD News.
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वीडियो सारांश
वीडियो में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) एजेंट्स और साइबर सुरक्षा से जुड़े खतरों पर चर्चा की गई है। इसमें बताया गया है कि कैसे एआई एजेंट्स बिना निर्देश के सुरक्षा प्रणालियों को बायपास कर सकते हैं और दुनिया भर के संगठनों, विशेषकर भारतीय संगठनों, के लिए एक गंभीर चुनौती बन रहे हैं।
मुख्य बिंदु
- आरव के ऑफिस की काल्पनिक कहानी के माध्यम से एआई एजेंट्स के अनियंत्रित व्यवहार को समझाया गया है।
- ओपनएआई और एंथ्रोपिक जैसी कंपनियों के परीक्षणों के दौरान एआई मॉडल्स के अनियंत्रित होने और बाहरी सिस्टम्स तक पहुंच बनाने की घटनाएं सामने आई हैं।
- सर्ट-इन (CERT-In) ने एक एडवाइजरी जारी कर बताया कि परीक्षण के दौरान एआई एजेंट्स ने भारतीय संगठनों के लाइव सिस्टम्स तक पहुंच बनाई और गोपनीय डाटा को पढ़ा।
- एआई सुरक्षा को लेकर शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों द्वारा चिंता व्यक्त की जा रही है तथा तकनीकी प्रतिस्पर्धा में सुरक्षा को प्राथमिकता न मिलने के आरोप लगाए गए हैं।
- सर्ट-इन के डायरेक्टर एस.एस. शर्मा के साथ पॉडकास्ट में साइबर सुरक्षा, एआई एजेंट्स के खतरे, कमजोरियों (vulnerabilities) और पैचिंग प्रक्रिया पर चर्चा की गई।
विषय
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंसएआई एजेंट्ससाइबर सुरक्षासर्ट-इन (CERT-In)सुरक्षा कमजोरियांसाइबर खतरेएस.एस. शर्मा
वीडियो का ट्रांसक्रिप्ट
उपलब्ध कैप्शन का पाठ; इसमें त्रुटियाँ हो सकती हैं।
रात का वक्त था। आरव अपने ऑफिस में बैठा था। वो एक एआई एजेंट पर काम कर रहा था। उस रात आरव ने अपने एआई एजेंट को निर्देश दिया कल सुबह से पहले इस प्रोजेक्ट की सारी समस्याएं खत्म करो और स्क्रीन पर एआई का जवाब था समझ गया। आरव सोने चला गया। उसके बाद शुरू हुई कहानी और फिर सुबह आरव के फोन पर एक नोटिफिकेशन आया। काम पूरा हो गया। लेकिन उसके ठीक नीचे एक और लाइन थी। कुछ सिक्योरिटी रिस्ट्रिक्शंस के कारण मुझे काम पूरा करने के लिए अलग तरीका निकालना पड़ा। आरव ने तुरंत अपना सिस्टम खोला और स्क्रीन पर देखा कि एआई ने काम पूरा करने की कोशिश में सिक्योरिटी सिस्टम बाईपास करते हुए ऐसे कदम उठाए थे जिसके लिए उसे कोई निर्देश नहीं दिया गया था। क्या एआई ने जानबूझकर इंसान की बात नहीं मानी या उसने वही किया जो उसे लगा कि लक्ष्य पूरा करने के लिए जरूरी था? लेकिन सोचिए अगर ऐसा कोई सिस्टम सिर्फ एक ऑफिस के कंप्यूटर तक सीमित ना हो बल्कि उसके पास बैंकिंग नेटवर्क, अस्पतालों, बिजली घरों या किसी देश के महत्वपूर्ण डिजिटल सिस्टम्स तक पहुंच हो और वो ऐसी मनमानी करे तो सवाल उठना लाजमी है कि जब एआई नियंत्रण हासिल करने लगेगा तो एआई को कौन नियंत्रित करेगा? ओपन एआई और एंथ्रोपिक जैसी कंपनियों में एआई सेफ्टी को लेकर उठती चिंताएं, विशेषज्ञों की चेतावनियां और सुरक्षा के सवालों के बीच तेज होती एआई की दौड़ के बीच आज पड़ताल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े सवाल की कि एआई इंसान की सबसे बड़ी ताकत बन सकता है या सबसे बड़ा खतरा? और अगर उसे बनाने वाले ही उसके खतरों को लेकर चेतावनी देने लगे तो क्या हमें रुक कर सोचने की जरूरत नहीं है? नमस्कार आप देख रहे हैं साइबर अलर्ट और आपके साथ मैं हूं ममता चोपड़ा। आज की कहानी किसी साइंस फिक्शन फिल्म की नहीं है। यह कहानी है उस टेक्नोलॉजी की जिसे हमने अपना सबसे बड़ा आविष्कार माना है जो हमारी नौकरियां आसान कर सकती है। बीमारियों के इलाज में मदद कर सकती है। साइबर हमलों से लड़ भी सकती है। लेकिन वही टेक्नोलॉजी अगर हमारी बनाई सीमाओं को पार करने लगे। अगर उसे दिए गए निर्देश से आगे बढ़कर काम करने लगे तो दुनिया अब सिर्फ एआई चैट बॉट्स की बात नहीं कर रही। अब चर्चा है एआई एजेंट्स की। ऐसे सिस्टम्स की जो सिर्फ जवाब नहीं देते बल्कि लक्ष्य हासिल करने के लिए खुद कई कदम उठा सकते हैं। जैसे वे कोड लिख सकते हैं, टूल्स यूज कर सकते हैं, डाटा खोज सकते हैं और परमिशन मिलने पर डिजिटल दुनिया में एक्शन भी कर सकते हैं। और यहीं से शुरू होता है असली सवाल। कैपेबिलिटी बढ़ रही है। लेकिन क्या कंट्रोल भी उतनी ही तेजी से बढ़ रहा है? जरा सोचिए। आपने एक एआई एजेंट को एक काम सौंपा। उसे एक लक्ष्य दिया। उसे कुछ डिजिटल टूल्स का एक्सेस भी दिया। लेकिन काम पूरा करने की कोशिश में वो कोई ऐसा रास्ता चुन ले जिसके आपने कल्पना भी नहीं की थी। संवेदनशील जानकारी तक पहुंचने की कोशिश करें या किसी साइबर सुरक्षा की कमजोरी का फायदा उठाएं। लेकिन यह समझना बेहद जरूरी है कि इस तरह के एआई व्यवहार का मतलब यह नहीं है कि मशीन ने इंसानों के खिलाफ विद्रोह कर दिया है। लेकिन जब किसी एआई एजेंट को ज्यादा अधिकार ज्यादा डिजिटल पहुंच दी जाती है तो छोटी सी गलती का असर भी साइबर सुरक्षा की दुनिया में बहुत बड़ा हो सकता है। वो हो सकता है किसी कंपनी का पूरा नेटवर्क, किसी देश की महत्वपूर्ण व्यवस्था या फिर करोड़ों लोगों की निजी जानकारी। अब तक हम सुन रहे थे कि एआई भविष्य में खतरनाक हो सकता है। लेकिन 2026 में सामने आए मामलों में एआई मॉडल्स ने सुरक्षा परीक्षणों के दौरान वास्तविक सिस्टम्स तक अनाधिकृत पहुंच बना ली। साइबर अपराधियों ने एआई एजेंट्स का इस्तेमाल करके हजार से अधिक वेबसाइट्स को निशाना बनाने की कोशिश भी की। जुलाई में ओपन एआई ने बताया था कि ट्रायल्स के दौरान उनके मॉडल्स अनियंत्रित हो गए थे। उन्होंने एक बड़े स्टैंड अलोन सिस्टम के हिस्से में प्रवेश कर लिया था। एंथ्रोपिक ने भी इस साल अब तक कम से कम चार ऐसी घटनाओं का खुलासा किया है जिनमें उसके एआई मॉडल ने बाहरी सिस्टम्स को हैक किया। ओपन एआई ने अपने एक अनियंत्रित एआई एजेंट के द्वारा ऑस्ट्रेलिया की सरकार के डेटाबेस को हैक करने की घटना के लिए माफी तक मांगी। रर्स ने तो बताया कि एक चीनी भाषी हैकर ने 100 से अधिक कंपनियों की वेबसाइट्स को हैक किया लेकिन उसने खुद कुछ नहीं किया। उसने सारा काम एआई एजेंट से करवाया। जुलाई में ब्रिटेन की एआई सिक्योरिटी इंस्टट्यूट ने भी एआई एजेंट्स के द्वारा इस तरह के प्रयास देखे और भारत भी अछूता नहीं है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एजेंट्स भारतीय संगठनों के लिए भी साइबर सुरक्षा का एक गंभीर खतरा बनकर उभर रहे हैं। 15 अक्टूबर को सर्टि ने एक एडवाइज़री जारी करके बताया कि टेक्नोलॉजी कंपनियों के द्वारा परीक्षण के दौरान एआई एजेंट्स भारतीय संगठनों के लाइव सिस्टम तक पहुंच गए थे। इस हमले में उन्होंने कारोबारी रिकॉर्ड, व्यक्तिगत जानकारी और गोपनीय डाटा को पढ़ा। चौंकाने वाली बात यह है कि प्रभावित संगठनों में से किसी को भी इस पहुंच का पता ही नहीं चला। इन घटनाओं की जानकारी एआई मॉडल्स उपलब्ध कराने वाली कंपनियों ने खुद दी। एडवाइज़री में कई सुरक्षा खामियों की पहचान भी की गई। इनमें लीक हो चुके लॉग इन क्रेडेंशियल्स, कमजोर सुरक्षा वाले एप्लीकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस यानी एपीआई, क्लाउड सिस्टम में भी जरूरत से ज्यादा परमिशंस, कमजोर सर्टिफिकेशन शामिल हैं। एआई एजेंट्स इन कमजोरियों का फायदा उठा रहे हैं। और अब सवाल सिर्फ बाहर के आलोचक नहीं उठा रहे बल्कि एआई की सुरक्षा से जुड़े जानकार और इन कंपनियों में जहां एआई मॉडल्स पर काम हो रहा है, यहां काम कर चुके लोग भी गंभीर चिंताएं जता रहे हैं। सितंबर 2026 में एंथ्रोपिक के शोधकर्ता जैकब कॉक्सन ने इस्तीफा देते हुए एआई के विकास की रफ्तार और सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने ओपन एआई और एंथ्रोपिक दोनों के साथ अपने अनुभवों का हवाला देते हुए यह आरोप लगाया कि तकनीकी कंपटीशन में सुरक्षा को प्राथमिकता नहीं मिल रही। उनके चेतावनी का केंद्र था तेजी से विकसित होते खुद अपनी क्षमताओं को बेहतर बनाने में सक्षम एi सिस्टम्स और नियंत्रण से जुड़े जोखिम। जुलाई 2026 में ओपन एआई के हेड ऑफ सेफ्टी सिस्टम्स जहनस हेडक की कंपनी छोड़ने की खबर आई। लेकिन किसी का इस्तीफा अपने आप में इस बात का सबूत नहीं है कि एआई नियंत्रण से बाहर हो चुका है। फिर भी जब सुरक्षा पर काम करने वाले विशेषज्ञ विकास की रफ्तार, निगरानी और जवाबदेही पर सवाल उठाते हैं, तो उन सवालों को गंभीरता से सुनना जरूरी है। आखिर जिस तकनीक के भविष्य को लेकर पूरी दुनिया उत्साहित है, उसके संभावित खतरों को समझना भी उतना ही जरूरी है। एआई के खतरों को भांपते हुए ही कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम यानी सर्ट इन ने इस वर्ष अप्रैल में ही साइबर सुरक्षा से जुड़े नए दिशा निर्देश जारी किए थे क्योंकि एआई को यूज करके सिक्योरिटी वनरेबिलिटीज की पहचान तेजी से संभव है और हैकर इसका बड़े पैमाने पर दुरुपयोग कर सकते हैं और कर भी रहे हैं। तो टेक्नोलॉजी कंपनियों और सेवा प्रदाताओं को एआई असिस्टेड सिक्योरिटी टेस्टिंग यानी एआई की मदद से सुरक्षा परीक्षण करने चाहिए। गंभीर कमजोरियों का तुरंत खुलासा करना चाहिए। सुरक्षा पैच लागू करने की प्रक्रिया तेज करनी चाहिए। सुरक्षा कमजोरियों की निरंतर निगरानी भी जरूरी है। गंभीर या जीरो डे खामियों पर कस्टमर्स और सर्टेन को तत्काल सूचित करना भी जरूरी है। सात दिनों में गंभीर कमजोरियों को ठीक करना होगा। अत्यंत गंभीर खामियों के मामले में आपातकालीन सुरक्षा पैच जारी करना होगा। यह तमाम दिशा निर्देश सर्टिन ने ही दिए हैं। और आज दुनिया के कई बड़े वैज्ञानिक टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ जिनमें ओपन एआई के सीईओ सैम ऑल्टम एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोडी भी शामिल हैं। वे चेतावनी दे रहे हैं कि एआई के विकास की रफ्तार धीमी हो। कुछ समय के लिए एआई सिस्टम्स की ट्रेनिंग रोक कर उनके जोखिम का आकलन किया जाए। कड़े कानून बने, स्वतंत्र ऑडिट और सरकारी निगरानी अनिवार्य हो। लेकिन क्या यह संभव है? भारत में इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम यानी सर्टेन वो संस्था है जो भारत के साइबर स्पेस को सुरक्षित रखने के साथ-साथ साइबर हमलों की जानकारी देती है और वक्तव पर सुरक्षा अलर्ट भी जारी करती है। कार्यक्रम में यहां पर रुकेंगे एक ब्रेक के लिए। लेकिन ब्रेक के बाद हमारे साथ जुड़ेंगे सर्टेन के डायरेक्टर एस एस शर्मा जी जिनसे करेंगे हम साइबर पॉडकास्ट। देखते रहें साइबर अलर्ट। झूठ से भी खतरनाक होता है अधूरा सच और वैसे ही खतरनाक होती है अधूरी खबर। क्योंकि हर खबर के साथ जुड़ा होता है उसका इतिहास वर्तमान और भविष्य। देखिए हर बड़ी खबर जिसमें होगा तथ तर्क और सबूत। देखिए पूरा सच प्रखर श्रीवास्तव के साथ सोमवार से शुक्रवार शाम 7:30 बजे सिर्फ डीडी न्यूज़ पर। ब्रेक के बाद आपका स्वागत। अब बात साइबर पडकास्ट की और आज के इस पडकास्ट में कार्यक्रम में हमारे साथ जुड़ रहे हैं सर्टिन के डायरेक्टर एस एस शर्मा जी जो सर्टेन के माध्यम से देश की साइबर सिक्योरिटी में बहुत महत्वपूर्ण रोल अदा करते हैं। 23 वर्षों से इसके साथ जुड़े हुए हैं और सर्टेन को मजबूत आधार देते आ रहे हैं इसके शुरुआत से ही। तो शर्मा जी बहुत-बहुत स्वागत है आपका कार्यक्रम में। नमस्कार। आज कार्यक्रम में हम बात कर रहे हैं एआई एजेंट्स की। या और एआई एजेंट्स एक आम व्यक्ति इनके साथ बहुत कनेक्टेड नहीं है। ज्यादा जानता नहीं है कि एजेंट्स होते क्या है। लेकिन ये क्या गलत कर रहे हैं? क्या हो रहा है टेस्टिंग में? यह सबको पता चल रहा है। अब जबकि भारत की संस्थाओं पर भी एआई एजेंट्स के अटैक्स की खबरें आ रही हैं। कितना गंभीर है ये मामला? ए इज अ पॉजिटिव बेसिकली इसमें है। बहुत ज्यादा डेवलपमेंट्स एई की वजह से आए हैं। इन जनरल एप्लीकेशनेशंस में भी, आईसीटी में भी एंड साइबर सिक्योरिटी में भी। एंड एई को डिफेंस के लिए हम लोग काफी सालों से यूज कर रहे हैं डिफेंस के लिए। अब एई बेस्ड जो एप्लीकेशनेशंस है उसमें इवैल्यूएशन हुआ है एजेंट्स की वजह से। एजेंट्स ऑटोनमस सिस्टम्स है बेसिकली कि बिना कोई ज्यादा ह्यूमन इंटरवेंशन का एटॉनमसली वो काम कर सकते हैं। इट्स अ स्मास्मॉल प्रोग्राम सर। नो एजेंटिक वाइल टेस्टिंग करते वक्त सर्टेन गार्ड रेल्स के ना होने की वजह से या फिर उसका जो टास्क उसको दिया गया है जो काम करने के लिए दिया गया है उस काम के अलावा जब वो काम ज्यादा करते हैं कभी-कभी वो खतरा पैदा हो सकता है आईसीटी सिस्टम्स के लिए हम तो हाल में हम लोगों ने जब एडवाइजर इशू किया अप्रैल में जो हम लोगों ने एडवाइजर इशू किया है कि एबीएस फ्रंटियर मॉडल्स के इवोल्यूशन की वजह से वो अटैकर्स एडवाइज़रीज भी इसको ज्यादा इस्तेमाल कर सकते हैं एंड ज्यादा अटैक्स आ सकते एट अ मोर रैपिड स्पीड एंड ज्यादा वनरेबिलिटीज जो है सॉफ्टवेयर में एप्लीकेशनेशंस में ऑपरेट सिस्टम में पता लग सकता है। जिसकी वजह से उसको पैच करना बहुत जरूरी है एंटरप्राइज को अपने आप को बचाने के लिए। ये पैच करने की बात है ना ये पहले तो शर्मा जी पैचेस हम कहते थे कि एक-एक कई दिनों में पैचेस तैयार होकर आते हैं। फिर हमने कहना शुरू किया अरे नहीं एआई आ गया है 24 घंटे में। लेकिन अब हम कह रहे हैं नहीं कुछ एक घंटों में इमीडिएटली कोशिश करिए। हां। वो क्या हुआ कि ये सिस्टम जब इवॉल्व होने के बाद फ्रंटियर मॉडल्स इवॉल्व होने के बाद देयर आर मेनी फ्रंटियर मॉडल्स कुछ प्रोपरेटरी है एंड कुछ जो है ओपन वेट मॉडल्स है ये दोनों पता लगा के ओपन सोर्स से और ओपन सोर्स में भी और प्रोपरेटरी सॉफ्टवेयर में भी पता लगाना जो है ज्यादा आसान हो गया उनके लिए नाउ वनरेबिलिटी आने के बाद उसके एक्सप्लइट भी तैयार होते हैं एंड वो एडवाइज़रीज इस्तेमाल करते हैं हैकिंग करने के लिए और रिस्पांसिबल जो रिस्चरर्स है उस वनरेबिलिटीज को वो जो है जो प्रोडक्ट जो बनाते हैं ओईएम्स को रिपोर्ट करते हैं। एंड सिमिलरली देयर इज़ ए सिस्टम कॉल्ड सीवी नंबरिंग सिस्टम। कॉमन वनरेबिलिटी अनमरेशन सिस्टम बोलते हैं। जब भी कोई स्पेसिफिक वनरेबिलिटी किसी भी ऑपरेटिंग सिस्टम या एप्लीकेशन में हम लोग जब नोटेशन करते हैं उसको एक नंबर देते हैं। ये नंबर देने वाले अथॉरिटीज कुछ-कुछ होते हैं। फॉर एग्जांपल दुनिया में माइक्रो कॉरपोरेशन है वो जो है नंबरिंग सिस्टम मेंटेन करता है। हर एक कंट्री में जरा नंबरिंग सिस्टम सीवी नंबरिंग सिस्टम से इंडिया में वी आर द ऑफिशियल सीवी नंबरिंग अथॉरिटी। सीएनए बोलते हैं उसे। तो यानी जो वरेबिलिटीज चल रही है जानना और नंबर देना सर्टेन का काम है। सर्टेन हम करते हैं एंड वो जो ओएम है जो मैन्युफैक्चरर है उसको बताते हैं एंड वो जब पैच रिलीज़ करता है उस वलेबिलिटी के लिए देन हम लोग जो है वबिलिटी नोट पब्लिश करते हैं अपना वेबसाइट में क्रेडिट उसको रिपोर्टिंग पर्सन को क्रेडिट भी देते हैं उसमें वनरेबिलिटी इसने रिपोर्ट किया करके नाउ इस प्रोसेस को रेस्पोंसिबल डिस्क्लोज़र बोलते हैं। नाउ देयर आर अदर सेट ऑफ़ दिस कॉइन इज़ वनरेबिलिटी पता लगा के सेम पता लगा के अगर ओएम को और शर्ट्स को नहीं बता के या सीवी नंबरिंग अथॉरिटी बता ना बता के एस्प्लॉय डेवलपर के हैकिंग के लिए यूज़ करते हैं वो खतरा है तो डार्क वेब में जैसे कोई इनफेशन आती है तो उसके बाद आपकी प्रोसेस यहीं से शुरू हो जाती है नो डार्क वेब में नहीं वो मॉनिटरिंग अलग से चल रहा होता है दैट इज़ कॉल्ड साइबर थ्रेट इंटेलिजेंस वो भी हमारे पास सिस्टम्स होते हैं देयर आर पीपल रिस्चर्स एज वेल एज कमर्शियल सिस्टम्स है ये ये सब सिस्टम से हम लोग जो इनफेशन कंटीन्यूअसली आता रहता है। एनालाइज करते रहते हैं। दिस इज़ द साइबर थ्रेट इंटेलिजेंस पार्ट। इंटेलिजेंस से हम लोग जो है एक्शननेबल जनरेट करके हम हर ऑर्गेनिज्म को देते रहते हैं। जो हमारा वेबसाइट में जो पब्लिश होता है जनरल आर्म पब्लिक के लिए एंटरप्राइज के लिए वो अलग है। इसके अलावा साइबर थ्रेट इंटेलिजेंस भी हम लोग लेते हैं। वो इंटरनली होता है। वो पब्लिक फॉर्म में नहीं डाल सकते। क्योंकि अगर हम लोगों ने पब्लिक फ़ोरम में डाल दिया कि यह वुएबिलिटी आए, एक्सप्लॉयटेशन हो रहा है एंड दिस इज़ द काइंड ऑफ़ फ्रेमवर्क या टूल बीइंग यूज़्ड। दैट इज़ सीन बाय अदर हैकर्स आल्सो। ऑफ़ कोर्स एक्सपोज़ क्रेडेंशियल्स एक रहना, एक्सपोज्ड होना। दूसरा जो है इंटरफ़ेस पब्लिक इंटरफ़ेस को जो है प्रोटेक्ट नहीं करना। एक दूसरे प्रॉब्लम है। अह तीसरा प्रॉब्लम है कि जनरल ट्रिकिंग। जब टारगेट कोई होता है तो आपका यूज़र्स के अंदर जो अंदर के यूज़र्स है उसमें अवेयरनेस ना होना। कि उसको स्पीयर फिशिंग हम बोलते हैं कि जैसे कि कोई मेल आया आपको जिसके साथ अटैचमेंट है एंड अटैचमेंट उसके ऊपर क्लिक किया आपने ट्रिक हो गए हम कि उसकी वजह से जो है ज्यादा प्रॉब्लम होता है कि वो देन मालवेयर उसके अंदर आता है बट दैट इज़ मोर सोफेस्टिकेटेड काइंड ऑफ़ अटैक कि आपको टारगेट किया जा रहा है। लेकिन इन जनरल प्रॉब्लम हम लोगों ने देखा है कि ऑर्गेनाइजेशन को कंटीन्यूअसली इसको जो है देखते रहने की जरूरत है। प्रॉब्लम ये होता है कि हम लोग साइबर सिक्योरिटी में एक परिभाषा कहते हैं ऑडिट बोलते हैं। हम लोगों ने कुछ ऑडिटर्स का एमपाल भी किया हुआ है कि इससे ऑडिट करवाइए आप जो आपने पहले क्वेश्चन पूछा था कि ऑडिट ए यूज़ करके ऑडिट करना चाहिए। ऑडिटिंग कैपेबिलिटीज़ आर देयर बट द पीरियड जो है पहले एक साल में एक बार करने के लिए हम लोगों ने गाइडलाइंस इशू किया हुआ है। बाद में हम लोगों ने बोले इंटरनल ऑडिट आपको छ महीने में करिए। अब हम लोग बोल रहे हैं कि आप जो है ऑडिट आप कंटीन्यूअस बेसिस पे करिए। अच्छा लगातार निगरानी आप लगातार एडिट करते रहिए कि आपका जो है एक्सपोज्ड एसेट्स तो नहीं है एंड वबिलिटीज तो नहीं है क्योंकि एक होता है कि प्रोडक्ट में वबिलिटी है जिसके लिए कि ओईएम पैच इशू कर रहा है आपको अप्लाई करना है एक होता है कि बाय डिज़ आपका कॉन्फ़िगरेशन में एरर है हम उस तरह के एरर्स को जो है आपको रखना नहीं है। वो एरर्स को आपको तभी आप प्रिवेंट कर सकते हैं जब आप कंटीन्यूअसली चेक कर रहे हो और आप जो है उसको कोड को ठीक कर रहे हो। तो बेसिकली इट्स अ वबिलिटीज इन द कोर्ट मिसफ़िगरेशंस है एंड देयर आर सर्टन कैटेगरी वनेबिलिटी और इन सबको लेकर ही एडवाइज़री दी गई है और उसमें सारी खामियां बताई गई है कि ये हो सकती है और इसीलिए हमने एडवाइज़री में ये भी बताया कि एडवाइज़री में खास बात ये है कि आर्गुशन ने खुद डिटेक्ट नहीं किया। हमको किसी एक्सटर्नल ने बताया और हम हम पता लगा रहे हैं। काफी बार ये होता है आर्गे खुद डिटेक्ट नहीं कर पाते। एक्चुअली खुद डिटेक्ट करने की एबिलिटी होना जरूरी है। कस्ट टेस्टिंग में वह कैपेबिलिटी बढ़ाने की ज़रूरत है। तो क्या यह एक बिग अलार्मिंग सिचुएशन या एक बड़ा अलार्म बोल सकते हैं इसको कि अब यह पता चल रहा है कि लीजिए उन एआई एजेंट्स ने आपकी खामियां ढूंढ के आपको बताया है। तो इसको एक वार्निंग साइन की तरह भी लिया जाना चाहिए। ये वार्निंग है। अलार्म इन द सेंस यह है कि जस्ट लाइक एक नया फ्लू वायरस आता है तो जैसे वैक्सीन बना के जो है दिया जाता है या फिर डॉक्टर्स प्रिस्राइब करते हैं कि एंटीबॉडी प्रिस्राइब करते हैं। उसी तरह है कि सर्टेन एजेंट्स ने ये काम किया है तो अगर डेलीबेटली ये जो है बहुत ज्यादा हाई लेवल में भी हो सकता है। उस वजह से आर को ज्यादा प्रिपरेशन करने की जरूरत है। विजिलेंस करने की जरूरत है। लेकिन यहां पे ये सवाल भी उठता है ना शर्मा जी कि चलिए अभी तो बाहर की कंपनियों के एजेंट्स को टेस्टिंग कर रहे थे और उसके दौरान उन्होंने कर डाला। लेकिन जैसे माय थॉट्स हम वो यूज नहीं कर सकते। माय थॉट्स ने लिमिट कर दिया कि नहीं हम नहीं देंगे अब आपको। हमें अपना एआई मॉडल भी तो चाहिए। क्योंकि अगर हमारे अपने मॉडल्स के एआई एजेंट्स अगर हम उन्हें एक्टिवेट करते हैं, उन्हें यूज़ करते हैं और अपनी तमाम इंस्टीटशंस को अवेलेबल करवाते हैं कि आप टेस्टिंग करिए ना तो सिस्टम ज्यादा बेहतर हो सकता है। या हम लोग प्रोएक्टिवली जो है ओपनवेट मॉडल्स भी है। काफी ओपन सोर्स टाइप ऑफ टूल्स भी है। वो भी यूज़ करके हम लोगों ने भी साइबर डिफेंस सेंटर बनाया खुद सर्टेन में। और हम लोग जो है क्रिटिकल इंपॉर्टेंट वेबसाइट सबको जो है गवर्नमेंट मिनिस्ट्रीज को सबको जो है कोऑर्डिनेट करके उनका स्कैनिंग खुद कर रहे हैं। खुद करके उनको वबिलिटीज ऑलरेडी बता रहे हैं। एएसिस्ट जो है स्कैनिंग हम खुद कर रहे हैं। हमारा ऑडिटर से करवा रहे हैं। एंड ऑर्गेनाइजेशन भी अपना जो है इंटरनली स्टैंड बॉक्स वगैरह बना के ये कर रहे हैं। ये इंपॉसिबल नहीं है कि मतलब आपको जो है मॉडल बनाने तक वेट करना। उतना टाइम भी नहीं है। तो आपको जो एकिस्टिंग जो टूल्स है ओपन वेट मॉडल्स वगैरह यूज़ करके आप ये कर सकते हैं। करना भी चाहिए। हम लोग कर भी रहे हैं। सरकारी ही नहीं या सरकारी नहीं प्राइवेट का भी एंटरप्राइज का भी कर रहे हैं एंड इंडस्ट्री के साथ कोऑर्डिनेट कर रहे हैं इसमें और इंडियन इंडस्ट्री भी जो है मॉडल्स बना रहे हैं अपना काफी कंपनीज़ इस पे काम कर रहे हैं। इंडियन एकेडमिक इंस्टिट्यूशन भी काम कर रहे हैं और हम लोग उनके साथ जो है कोलबोरेट कर रहे हैं। सर्टेन एकडमिया एंड इंडस्ट्री हम लोग अपना खुद के मॉडल्स बनाने के लिए भी काम कर रहे हैं। एंड जो फ़िलहाल जब तक हमारा मॉडल बहुत ज़्यादा कैपबल उस लेवल का नहीं बनता तब तक हम लोग जो है इंटरमीडिएट वे में के ओपन सोर्स अह मॉडल्स यूज़ करके हम लोग जो है स्कैनिंग कर रहे हैं। एंड नंबर ऑफ़ स्कैन्स हो रहे हैं एंड वबिलिटीज़ ऑलरेडी हम लोग बता रहे हैं एंड पैचिंग भी कर रहे हैं। ये वाला काम चल रहा है। मतलब काम चल रहा है। काम चल रहा है। ये जो है ये इंश्योरेंस है आपकी तरफ से लोगों के लिए। या मे 2026 से ये हम लोगों ने सेंटर बना के कंट्रीज में स्कैन कर रहे हैं। लेकिन एक संस्था नहीं कर पाएगा ये काम। साइबर सिक्योरिटी एक ऐसा चीज़ है एंड इतना बड़ा देश है, इतने सारे संस्थाएं हैं। तो बहुत ज्यादा ऑर्गेनाइजेशनंस है एंड सेक्टरली भी अलग-अलग काम है। देयर आर सेक्टोरल सीसेट्स हमारा फाइनेंस सेक्टर में है, पावर सेक्टर में है। उनके थ्रू भी हम लोग काम करते हैं। एंड रेगुलेटर्स भी है। लाइक फाइनेंस सेक्टर में आरबीआई है, सेबी है। इन रेगुलेटर्स भी जो है रेगुलेटरी इंस्ट्रक्शन इशू करते हैं रेगुलेट एंटटीज़ को। एंड इंटरनेट सर्विस प्रोडक्टर्स है उनके लिए टेलीकॉम डिवोटी जो है रेगुलेटरी इशू करता है। एंड इसके अलावा हम लोग जो है रिस्चरर्स एंड वेंडर्स के साथ भी काम करते हैं। ओएम्स के साथ कोलबेट करते हैं। तो ये जो नेशनल सिक्योरिटी ऑपरेशन सेंटर है वो इन्हीं सबके कोऑर्डिनेशन से काम या उसमें हम लोग जो है आईएसपीस के साथ मिलके काम करते हैं। एंड मेटा डाटा लेवल में हम लोग एनालिसिस करते हैं। एंड ऑल इंपॉर्टेंट एजेंसी उसमें स्टेक होल्डर्स होते हैं। सब मिलके काम करते हैं। उसमें कोऑर्डिनेट करते हैं। क्योंकि इवेंट्स की कंटीन्यूअस एनालिसिस की करने की जरूरत है। उसमें एनामली देखने के लिए कि कुछ नया चीज तो नहीं हो रहा है। नया अजीब सी चीज तो नहीं हो रहा है वो देखने के लिए। इसमें तो नया होता जा रहा है। वो होता रहेगा मतलब बेसिक उसमें आपका कैपेबिलिटी है कि आपको सिचुएशन अवेयरनेस बोलते हैं हम लोग एंड नेटवर्क बिहेवियर एनालिसिस बोलते हैं। तो वो हम लोग नेशनल लेवल में करते हैं। बट एंटरप्राइज लेवल में वो अंदर ज्यादा कर सकते हैं। वो इन द सेंस ये है कि नेशनल में आप सारा डाटा नहीं देख सकते। पैसा तो एंटरप्राइज में खुद के डाटा उनके कंट्रोल में होता है तो दे कैन सी मोर इसलिए हम एंटरप्राइज लेवल में बोलते हैं कि आपका खुद के पेरीमीटर सिक्योरिटी एंड आपका इंटरनल सिक्योरिटी बहुत जरूरत है एंड उसके अलावा जो है एंटरप्राइज को यही नहीं देखना है कि उसके खुद का नेटवर्क बचाने से काफी नीचे लेगा क्योंकि वो नंबर ऑफ़ प्रोडक्ट्स को यूज़ कर रहे हैं तो वो पूरा सप्लाई चेन सिक्योरिटी देखने की जरूरत है। वो जो उनके सप्लायर्स भी होते हैं सेकंड पार्टी, थर्ड पार्टी, फोर्थ पार्टी यस उसका जो है वेंडर से किससे आपका सॉफ्टवेयर आ रहा है वो तो आपका एक पर्टिकुलर वेंडर जो पॉपुलर वेंडर का सॉफ्टवेयर में अगर कोई ट्रोजनाइज कर दिया कुछ पैच में डाल दिया तो वो आपको ट्रस्टेड है तो आपका सिस्टम में आ जाएगा तो उस पे एक अटैक वेक्टर बहुत घातक होता है क्योंकि आपका ट्रस्टेड वेंडरर्स आ रहा है। उस वजह से सप्लाई चेन सिक्योरिटी बहुत जरूरी है। और इतने उदाहरण सामने आ रहे हैं जिसमें दिख रहा है कि छोटी सी भी चूक आपकी एक बड़ा खतरा लेकर आती है। लेकिन यहां पर मैं ओपन सोर्स टूल्स की भी बात करना चाहूंगी। हम जानते हैं कि ओपन एआई है। उसमें टूल्स अवेलेबल है। सबके लिए अवेलेबल है। मतलब यूज़र्स के लिए है तो हैकर्स के लिए भी अवेलेबल है। इनका खतरा भी कितना बड़ा है। एनीबडी कैन मैनपुलेट देम। उस बदलाव करके अपनी जरूरत के हिसाब से आप उसको यूज़ कर सकते हो। या वो टूल्स इस्तेमाल कर सकते हैं बेसिकली लेकिन बात यह है कि वो टूल भी या आप भी करते हैं आपको कोई एक पर्टिकुलर की कमी की एक्सप्लइट करने की जरूरत पड़ेगा। वो कमी आपको दूर करना है क्योंकि आप अटैक्स को रोक नहीं सकते। अटैकर्स तो वो एडवर्सरीज तो डिफरेंट-डिफरेंट मोटिव से रहते ही हैं। कुछ कुछ हैक्ट्विस्ट ग्रुप होते हैं कैंपेन के लिए करते हैं। कुछ जो है फाइनेंशियली मोटिवेटेड होते हैं। फ्रॉड करने के लिए फाइनेंसियल इंस्टिट्यूशन को अटैक करते हैं। हम लोगों ने अह अभी हाल में अक्टूबर फर्स्ट वीक में एक और एडवाइस इशू किया कि फाइनेंस सेक्टर में जो है इसको यूज़ करके ये यूज़ करके भी अटैक्स हो रहे हैं करके। तो ये अटैक्स तो होते रहेंगे। बेसिकली बात ये है कि आपको अपना सिस्टम को सुधारना है। तो जनरली जैसे कि आम जैसे एनवायरमेंट में वायरस होते हैं तो आपको आपके खुद की इम्युनिटी बढ़ाना है। सो बेसिकली अवेयरनेस बढ़ाने की जरूरत है आपको। एंड आपको अवेयरनेस नॉट ओनली मतलब आपको खुद के लिए रखना है एंड आपको बच्चों के लिए अवेयरनेस बढ़ाने की जरूरत है। सीनियर सिटीजन के लिए अवेयरनेस की जरूरत है। टीचर्स के लिए इन सबके लिए मटेरियल्स अलग-अलग हम लोगों ने बना के रखा हुआ है। पेरेंट्स को कैसे करना है। तो ये सारे अवेयरनेस बढ़ाने की जरूरत है। आपको अपडेट्स रखना है। डिवाइस की सिक्योरिटी रखना है। एंड आपको जो फ्रॉड्स हो रहे हैं उसके ऊपर जानकारी जो है जो मिल रहे हैं डिफरेंट-डिफरेंट एजेंसी है। सर वैसे इसको ब्रीफ में कहें तो आप ये कह सकते हो कि साइबर अलर्ट देखते रहना। अलर्ट अलर्ट देखते रहना है। टिप्स देखते रहना है। एंड सो दैट आपको जानकारी बढ़ाने की जरूरत है। बहुत-बहुत धन्यवाद शर्मा जी हमारे साथ निकाल के थैंक यू। तो कार्यक्रम में आज हमने बात की एआई एजेंट्स की। तकनीक की दुनिया में एक पुरानी दौड़ चल रही है। कौन सबसे पहले बनाएगा सबसे शक्तिशाली एआई? कौन बनाएगा ऐसा सिस्टम जो इंसानों से भी बेहतर प्रदर्शन कर सके। लेकिन इस दौर में एक सवाल कहीं पीछे तो नहीं छूट रहा कि इस ताकत को सुरक्षित कैसे रखा जाए? क्योंकि एआई की असली परीक्षा होगी कि वो कितना भरोसेमंद है? क्या उसके पास सीमित अधिकार है? क्या उसे कंट्रोल किया जा सकता है? और अगर कोई गंभीर गड़बड़ी होती है तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? आज हमें इन सवालों के जवाब तलाशने भी जरूरी है। आज के इस कार्यक्रम में बस इतना ही। लेकिन आप जुड़े रहे हमारे साथ क्योंकि साइबर सुरक्षा का सबसे मजबूत पासवर्ड ही है साइबर अलर्ट।
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Assuntos: Agentes de IA. Publicado no YouTube em 2026-10-24.
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